ईरान-अमेरिका समझौते का पाठ
मनीषा
- 18 Jun 2026, 11:12 AM
- Updated: 11:12 AM
वाशिंगटन, 18 जून (एपी) अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने ईरान के साथ हुए समझौते की शर्तों को कई दिनों तक गोपनीय रखे जाने के बाद बुधवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पाठ पत्रकारों को पढ़कर सुनाया।
अधिकारियों ने उनका नाम उजागर न किए जाने की शर्त पर समझौते का पाठ पढ़ा। समझौते पर हस्ताक्षर के लिए औपचारिक समारोह शुक्रवार को प्रस्तावित है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बाद में जो पाठ जारी किया, वह काफी हद तक अमेरिका की ओर से दी गई जानकारी जैसा ही था।
दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बाद में कहा कि अमेरिका और ईरान के नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और यह ''तत्काल प्रभाव से लागू होगा।''
समझौते में किए गए प्रावधान इस प्रकार हैं:
1. अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान तथा मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा करते हैं। वे यह वादा करते हैं कि अब वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध या सैन्य अभियान शुरू नहीं करेंगे और एक-दूसरे के विरुद्ध बल प्रयोग करने या इसकी धमकी देने से बचेंगे। वे लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रतिबद्ध होंगे।
अंतिम समझौता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की स्थायी समाप्ति और इस पैरा के अन्य प्रावधानों की पुष्टि करेगा।
2. अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का संकल्प लेते हैं।
3. अमेरिका और ईरान अधिकतम 60 दिन में वार्ता करके अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस अवधि को दोनों पक्षों की सहमति से बढ़ाया जा सकता है।
4. इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना तथा ईरान के खिलाफ समुद्री गतिविधियों में अन्य बाधाओं को दूर करना शुरू करेगा। वह 30 दिन के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त कर देगा।
इस अवधि में ईरान पोतों की आवाजाही को युद्ध से पहले के स्तर पर बहाल करेगा।
अमेरिका अंतिम समझौता होने के 30 दिन के भीतर ईरान के आसपास तैनात अपनी सेनाओं को हटाने का भी वचन देता है।
5. इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही ईरान फारस की खाड़ी से ओमान सागर और वहां से फारस की खाड़ी तक वाणिज्यिक पोतों की सुरक्षित आवाजाही के लिए हरसंभव व्यवस्था करेगा। यह सुविधा केवल 60 दिन तक बिना किसी शुल्क के उपलब्ध होगी।
वाणिज्यिक पोतों की आवाजाही तत्काल शुरू हो जाएगी। तकनीकी एवं सैन्य बाधाएं दूर करने और ईरान द्वारा समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इसे 30 दिन के भीतर पूरी तरह बहाल किया जाएगा।
ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य में प्रबंधन और समुद्री सेवाओं की व्यवस्था तय करने के लिए ओमान के साथ बातचीत करेगा। इस प्रक्रिया में फारस की खाड़ी के अन्य तटीय देशों से भी चर्चा की जाएगी और लागू अंतरराष्ट्रीय कानून एवं होर्मुज जलडमरूमध्य के तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों का पालन किया जाएगा।
6. अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर की एक निश्चित एवं आपसी सहमति वाली योजना तैयार करने का संकल्प लेता है।
इस योजना को लागू करने की व्यवस्था 60 दिन के भीतर होने वाले अंतिम समझौते के तहत तय की जाएगी।
इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के लिए आवश्यक सभी लाइसेंस, छूट और अनुमतियां अमेरिका प्रदान करेगा।
7. अमेरिका अंतिम समझौते के तहत तय समयसारिणी के अनुसार ईरान के खिलाफ सभी प्रकार के प्रतिबंध समाप्त करने का वचन देता है। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के शासी मंडल के प्रस्तावों तथा अमेरिका के सभी एकतरफा प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध शामिल हैं।
ईरान और अमेरिका इन प्रतिबंधों को समाप्त करने के मुद्दे के अत्यधिक महत्व को स्वीकार करते हैं। दोनों पक्ष इस पर आपसी सहमति बनाने के लिए वार्ता में तत्काल चर्चा शुरू करने की मंशा व्यक्त करते हैं।
8. ईरान इस बात की फिर पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार न तो खरीदेगा और न ही विकसित करेगा।
अमेरिका और ईरान संवर्धित परमाणु सामग्री के भंडार के निपटारे के लिए आपसी सहमति से एक व्यवस्था तय करेंगे। यह व्यवस्था पैरा सात में उल्लिखित समयसारिणी के अनुसार होगी।
इसके तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में ईरान में संवर्धित सामग्री में कम संवर्धित सामग्री मिलाकर उसके संवर्धन का स्तर घटाया (डाउनब्लेंडिंग) जाएगा।
अंतिम समझौते में दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य एक रूपरेखा तय होने के बाद, ईरान की परमाणु जरूरतों से जुड़े यूरेनियम संवर्धन और आपसी सहमति वाले अन्य मामलों पर भी चर्चा करेंगे।
अंतिम समझौते में इस पैरा के प्रावधानों की पुष्टि की जाएगी। अमेरिका और ईरान उपरोक्त परमाणु मुद्दों के अत्यधिक महत्व को स्वीकार करते हैं और उन पर आपसी सहमति बनाने के लिए तत्काल वार्ता करने की मंशा व्यक्त करते हैं।
9. अंतिम समझौता होने तक अमेरिका और ईरान यथा स्थिति बनाए रखने पर सहमत हुए हैं। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर यथा स्थिति बनाए करेगा। अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात नहीं करेगा।
10. अमेरिका इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही और प्रतिबंध समाप्त होने तक ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों तथा उनसे बने उत्पादों के निर्यात के लिए प्रतिबंधों में छूट जारी करेगा। अमेरिकी वित्त मंत्रालय बैंक लेनदेन, बीमा, परिवहन और इनसे जुड़ी अन्य सभी सेवाओं के लिए भी आवश्यक छूट देगा।
11. अमेरिका इस समझौता ज्ञापन का क्रियान्वयन शुरू होते ही ईरान की 'फ्रीज' या प्रतिबंधित धनराशि और संपत्तियों को इस्तेमाल के लिए पूरी तरह उपलब्ध कराने का वादा करता है।
अमेरिका और ईरान वार्ता के दौरान इस धनराशि को जारी करने की प्रक्रिया पर आपसी सहमति बनाएंगे।
इस धनराशि को (मूल खाते में रखी जाए या किसी अन्य खाते में स्थानांतरित की जाए) ईरान के केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित किसी भी अंतिम लाभार्थी को भुगतान करने के लिए पूरी तरह इस्तेमाल करने योग्य बनाया जाएगा।
अमेरिका इसके लिए सभी आवश्यक लाइसेंस और अनुमतियां जारी करने का संकल्प लेता है।
12. अमेरिका और ईरान इस समझौता ज्ञापन के सफल क्रियान्वयन तथा भविष्य में अंतिम समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी व्यवस्था स्थापित करने पर सहमत हुए हैं।
13. इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और इसके पैरा एक, चार, पांच, 10 तथा 11 का क्रियान्वयन शुरू होने एवं लगातार जारी रहने के बाद अमेरिका और ईरान अंतिम समझौते के संबंध में शेष पैरा पर वार्ता शुरू करेंगे।
14. अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिये मंजूरी दी जाएगी।
एपी सिम्मी मनीषा
मनीषा
1806 1112 वाशिंगटन