'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए ठगी : सीबीआई ने 16 राज्यों में छापेमारी की
नोमान
- 25 Jun 2026, 03:40 PM
- Updated: 03:40 PM
(परिवर्तित स्लग से)
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उच्चतम न्यायालय की फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल कर 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ 16 राज्यों में 80 स्थानों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
एजेंसी ने 'ऑपरेशन चक्र-छह' के तहत पश्चिम में पंजाब और गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर में असम और मणिपुर तक 16 राज्यों में 60 विशेष टीमें तैनात कीं। उन्होंने साइबर धोखाधड़ी के 200 से अधिक मामलों से जुड़े कथित गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की।
'डिजिटल अरेस्ट' साइबर माध्यम से जबरन पैसे वसूलने के सबसे खतरनाक रूपों में से एक के तौर पर उभरा है जहां पीड़ितों से पुलिस अधिकारी, केंद्रीय एजेंसियों के जांचकर्ता या न्यायिक अधिकरी बनकर संपर्क किया जाता है और उन्हें डरा धमका कर पैसे ठगे जाते हैं।
पीड़ितों को आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है और उन्हें गिरफ्तारी या अभियोजन से बचने के लिए पैसे देने को मजबूर किया जाता है।
सीबीआई ने कहा कि इस धोखाधड़ी के केंद्र में एक वेबसाइट है जिसका यूआरएल (यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर) 'भ्रामक रूप से' उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट से मिलता जुलता है।
प्रवक्ता ने कहा, "जालसाजों ने 'डिजिटल अरेस्ट' की आड़ में कथित तौर पर पीड़ितों को ठगने के लिए धोखा देने वाला डोमेन पंजीकृत कराया और इसका इस्तेमाल किया। भारत के उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री से प्राप्त शिकायत के आधार पर, सीबीआई ने एक प्राथमिकी दर्ज की और मामले की जांच शुरू की।"
यह अभियान क्रमशः चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपियों बी नरेश और संजीव साहा की गिरफ्तारी के साथ समाप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि वे उस गिरोह का हिस्सा थे जो धोखे, धमकी और तकनीकी छल के माध्यम से लोगों को ठगता था।
आरोपियों ने पैसों के असली स्रोत और लेन-देन को छिपाने के लिए कथित रूप से फर्जी कंपनियां बनाईं तथा दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल किया।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "कथित तौर पर इन खातों का इस्तेमाल अपराध की संदिग्ध आय के लगभग दो करोड़ रुपये के शोधन के लिए किया गया था।"
जालसाजों ने उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट जैसी वेबसाइट पर आधिकारिक अदालती आदेशों, वारंटों और नोटिसों से मिलते-जुलते जाली दस्तावेज़ बनाकर जनता के साथ विश्वासघात किया।
एजेंसी ने उन्नत फोरेंसिक तकनीकों का उपयोग करके उस आपराधिक नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों की पहचान की, जो भारत के अंदर और विदेशों से भी सक्रिय था।
सीबीआई ने कहा कि जांच में ऐसे सबूत सामने आए हैं जो बताते हैं कि आपराधिक गिरोह ने भारतीय नागरिकों के अलावा विदेशी नागरिकों को भी निशाना बनाया होगा।
तलाशी के दौरान, जांचकर्ताओं ने मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की।
भाषा तान्या नरेश
नरेश नोमान
नोमान
2506 1540 दिल्ली