हर फाइल अनगिनत नागरिकों की उम्मीदों व जिंदगियों से जुड़ी होती है: प्रधानमंत्री मोदी
नरेश
- 23 Jun 2026, 05:07 PM
- Updated: 05:07 PM
(कॉपी में फेरबदल के साथ रिपीट)
नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के युवा अधिकारियों से हर फैसले में लोक हित को केंद्र में रखने का आह्वान करते हुए कहा कि हर फाइल अनगिनत नागरिकों की उम्मीदों, चिंताओं और जिंदगियों से जुड़ी होती है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से शासन में संवेदनशीलता, जवाबदेही और समावेशिता सुनिश्चित करने को भी कहा।
प्रधानमंत्री 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इन अधिकारियों को यहां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिवों के तौर पर तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास की बड़ी चुनौतियों का अलग-अलग हल नहीं किया जा सकता और सार्थक एवं स्थायी परिणाम के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
उन्होंने युवा प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि वे मज़बूत मकसद, नवाचार और नागरिक-केंद्रित शासन के साथ खुद को राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित करें। प्रधानमंत्री ने उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा हर प्रशासनिक फाइल के पीछे के मानवीय प्रभाव को ध्यान में रखें।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार मोदी ने कहा कि हर फाइल अनगिनत नागरिकों की आकांक्षाओं, चिंताओं और ज़िंदगी से जुड़ी होती है।
बयान में कहा गया है कि ''नागरिक देवो भव'' के मंत्र पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे हर फ़ैसले में नागरिकों को केंद्र में रखें और यह सुनिश्चित करें कि शासन संवेदनशील, जवाबदेह और समावेशी बना रहे।
उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे राष्ट्र-निर्माण में अपने योगदान का लगातार मूल्यांकन करें और पद से नहीं, बल्कि हासिल किए गए नतीजों से संतुष्टि प्राप्त करें।
मोदी ने कहा कि क्षेत्र में काम करने और प्रशासनिक सीख लेने के दो साल बाद, अधिकारी अब एक अहम मोड़ पर हैं, जहां उनके फैसले न सिर्फ उनके अपने करियर को, बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी आकार देंगे।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जनसेवा की असली परीक्षा ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ मौजूदा स्थितियों को संभालने से शुरू होती है।
''विकसित भारत 2047'' के विजन पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशकों में हर नीति और प्रशासनिक फ़ैसले का योगदान विकसित भारत बनाने की दिशा में होना चाहिए।
सरकार के सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान करते हुए उन्होंने ज़ोर दिया कि आज देश की प्राथमिकताओं में ''आत्मनिर्भर भारत'', ''मेक इन इंडिया'', विनिर्माण में बढ़ोतरी, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए अवसर पैदा करना शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने पिछले 10 साल में शासन में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रशासन प्रक्रिया-केंद्रित मॉडल से हटकर परिणामोन्मुख दृष्टिकोण की ओर बढ़ा है। उन्होंने ''सेवा आपूर्ति'' को बेहतर बनाने और नागरिकों को सेवा पाने में आसानी एवं पारदर्शिता के लिए डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका का ज़िक्र किया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से यह गौर करें कि क्या नीतियां ज़मीनी स्तर पर असरदार ढंग से नतीजों में बदल रही हैं।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर भी ज़ोर दिया और बताया कि मौजूदा बैच में 40 प्रतिशत से ज़्यादा महिला अधिकारी हैं।
उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी ऊर्जा, हुनर और लगन भारत की विकास यात्रा को नयी ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस मौके पर युवा प्रशिक्षु अधिकारियों ने काम करने के दौरान मिले अनुभवों को भी साझा किया।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्र और शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक श्रीराम तारनिकांती समेत कई अन्य लोग मौजूद थे।
भाषा अविनाश नरेश
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