एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामला: न्यायालय ने शोमा कांति सेन को जमानत दी
सुभाष देवेंद्र
- 05 Apr 2024, 07:31 PM
- Updated: 07:31 PM
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में जून 2018 में गिरफ्तार महिला अधिकार कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद शोमा कांति सेन को शुक्रवार को जमानत दे दी।
न्यायालय ने लंबे समय तक उनके हिरासत में रहने के बावजूद आरोप तय करने में देरी का ‘‘समग्र प्रभाव’’ पड़ने का संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी किया।
शीर्ष अदालत ने सेन (66) पर कई शर्तें भी लगाईं जिनमें जमानत पर रहने के दौरान उन्हें अपने मोबाइल फोन का ‘जीपीएस’ चौबीसों घंटे चालू रखना होगा और उनका फोन जांच अधिकारी के साथ जोड़ा जाएगा ताकि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) किसी भी समय अपीलकर्ता के सटीक स्थान का पता लगा सके।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि सेन जांच अधिकारी को अपने निवास के स्थान के बारे में बताएंगी, केवल एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करेंगी और विशेष अदालत की अनुमति के बगैर महाराष्ट्र से बाहर नहीं जाएंगी।
पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मोबाइल चौबीस घंटे चालू और चार्ज रहे, ताकि वह जमानत पर रहने की पूरी अवधि के दौरान लगातार उपलब्ध रहें।’’
इसने निर्देश दिया कि जमानत पर रहते हुए, सेन को हर पखवाड़े में एक बार संबद्ध पुलिस थाने के प्रभारी को रिपोर्ट करनी होगी।
पीठ ने कहा, ‘‘यदि इनमें से किसी भी शर्त या विशेष अदालत द्वारा स्वतंत्र रूप से लगायी जाने वाली किसी अन्य शर्त का उल्लंघन होता है, तो अभियोजन पक्ष के लिए अपीलकर्ता को दी गई जमानत को रद्द करने का विशेष अदालत के समक्ष अनुरोध करने का विकल्प खुला होगा।’’
अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर और महिला अधिकार कार्यकर्ता सेन को छह जून, 2018 को गिरफ्तार किया गया था।
यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित एल्गार परिषद के एक कार्यक्रम में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि इस कार्यक्रम के अगले दिन शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी।
पुणे पुलिस का दावा है कि इस कार्यक्रम को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।
मामले में 12 से अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को आरोपी बनाया गया है। मामले की जांच एनआईए कर रही है।
भाषा सुभाष