नवीकरणीय ऊर्जा के लिए गलियारा स्थापित करने पर विचार कर रहे भारत और सिंगापुर
देवेंद्र जोहेब
- 16 Jan 2025, 11:52 PM
- Updated: 11:52 PM
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन षणमुगरत्नम ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और सिंगापुर उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घनिष्ठ संबंध बनाने के अलावा ‘‘नवीकरणीय ऊर्जा के लिए गलियारा’’ स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं।
भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर आए सिंगापुर के नेता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अलग-अलग वार्ता की, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने पर व्यापक ध्यान केंद्रित किया गया।
षणमुगरत्नम ने संवाददाताओं से कहा कि पिछले वर्ष सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी की सिंगापुर यात्रा के दौरान संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने के बाद सिंगापुर और भारत अब सहयोग के ‘‘नए पथ’’ पर हैं।
मोदी-षणमुगरत्नम बैठक पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।
षणमुगरत्नम ने कहा, ‘‘हम मौजूदा संबंधों से आगे बढ़कर नई योजनाओं की तलाश कर रहे हैं। हम उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर में सहयोग कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारत के साथ संबंधों को लेकर आशावादी हूं। मैं आशावादी इसलिए हूं क्योंकि हमारे नेता एक-दूसरे से सहमत हैं। हम स्वाभाविक साझेदार हैं। सिंगापुर ने 2047 तक विकसित देश बनने की भारत की महत्वाकांक्षा में सहयोग किया है।’’
सिंगापुर के राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि कैसे भारत ने लगभग छह दशक पहले उनके देश को मान्यता दी थी।
उन्होंने कहा, ‘‘हम यह कभी नहीं भूलेंगे कि भारत 1965 में सिंगापुर की स्वतंत्रता को मान्यता देने वाले पहले कुछ देशों में से एक था। और तब से हमारे संबंध काफी मजबूत हुए हैं।’’
षणमुगरत्नम ने कहा, ‘‘यह एक छोटे से देश सिंगापुर और एक बहुत बड़े देश भारत के बीच एक स्वाभाविक साझेदारी है। लेकिन हमने ऐसे तरीके खोजे हैं जिनसे विभिन्न क्षेत्रों में आपसी हित जुड़े हैं।’’
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार शाम सिंगापुर के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी।
भाषा देवेंद्र