संसद ने तेलक्षेत्र संशोधन विधेयक को मंजूरी दी
अविनाश माधव
- 24 Mar 2025, 03:39 PM
- Updated: 03:39 PM
नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) राज्यसभा ने सोमवार को हंगामे के बीच खनिज तेल उत्खनन के लिए ‘एकल परमिट’ प्रणाली लाने और समग्र ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लक्ष्य वाले एक अहम विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी।
उच्च सदन की बैठक दो बाद के स्थगन के बाद जब ढाई बजे शुरू हुई तो उपसभापति हरिवंश की अनुमति से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘तेलक्षेत्र (विनियमन तथा विकास) संशोधन विधेयक, 2024’ को पारित करने के लिए पेश किया।
राज्यसभा में यह विधेयक मूल रूप से पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान तीन दिसंबर को पारित हुआ था और उसके बाद यह विधेयक लोकसभा को भेजा गया था। लोकसभा ने 12 मार्च को यह विधेयक सरकारी संशोधन के साथ पारित कर दिया जिसकी वजह से इसे एक बार फिर उच्च सदन की मंजूरी दिलाना जरूरी हो गया था।
राज्यसभा ने सोमवार को यह विधेयक बिना चर्चा के ही हंगामे के बीच पारित कर दिया। इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गयी। उच्च सदन ने जिस समय इस विधेयक को मंजूरी दी, उस समय विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष के सदस्य हंगामा कर रहे थे।
पुरी ने तीन दिसंबर को विधेयक पर उच्च सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा था कि तेल राष्ट्रीय संपत्ति है और देश के विकास के लिए इसका समुचित तरीके से दोहन किया जाना चाहिए और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इस क्षेत्र में आत्म निर्भरता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा था कि तेल एवं गैस क्षेत्र में बड़े निवेश की जरूरत होती है और परिणाम मिलने में लंबा समय लगता है। उनका कहना था, ‘‘पूर्ववर्ती सरकारों की नीतिगत पंगुता का खामियाजा हमें भुगतना पड़ा। 2006 से 2014 का समय वह था जब कई विदेशी कंपनियों ने हमसे मुंह मोड़ लिया था क्योंकि उन्हें देश में काम करने की अनुमति नहीं मिल पाई थी। इसके प्रतिकूल परिणाम मिले।’’
उन्होंने कहा कि दुनिया में पांच बड़ी तेल कंपनियां हैं। ‘‘हम इनका लाभ नहीं उठा सके।’’
पुरी ने कहा कि यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि निवेशक एक ही लीज, एक ही लाइसेंस के साथ अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर सकें और विवादों का समाधान भी तय समय पर होगा।
उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए भी इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, लाभकारी स्थिति है।
उन्होंने कहा कि तेल एक राष्ट्रीय संपत्ति है और देश की बेहतरी के लिए इसका दोहन किया जाता है। उन्होंने कहा कि तमाम पहलुओं को ध्यान में रख कर ही यह संशोधन विधेयक लाया गया है।
भाषा अविनाश