भारत के शीर्ष विज्ञान सलाहकार ने क्वांटम तकनीक में रणनीतिक स्वायत्तता की वकालत की
संतोष मनीषा
- 14 Apr 2025, 05:53 PM
- Updated: 05:53 PM
नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) भारत के शीर्ष विज्ञान सलाहकार ने सोमवार को ‘क्वांटम प्रौद्योगिकी’ के क्षेत्र में देश की कंपनियों की अनुपस्थिति पर चिंता जताई और जोर देकर कहा कि आयात पर बहुत अधिक निर्भरता तेजी से उभरते क्षेत्र के नवजात घरेलू परिवेशी तंत्र में व्यवधान पैदा कर सकती है।
यहां एक बयान में, सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय सूद ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी एक ऐसा क्षेत्र है जहां कोई भी देश पीछे नहीं रहना चाहता क्योंकि यह रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण है।
‘क्वांटम के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी जुड़ाव रणनीति’ (आईटीईएस-क्यू) के पहले संस्करण को जारी करते हुए सूद ने कहा, ‘‘क्वांटम-सुरक्षित हुए बिना रणनीतिक स्वायत्तता हासिल नहीं हो सकती।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पीएचडी कर रहे और पीएचडी कर चुके शोधकर्ताओं के विश्लेषण से पता चला है कि उद्योग का वित्तपोषण वर्तमान में सीमित चरण में है। सर्वेक्षण में शामिल केवल 2.6 प्रतिशत शोधकर्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उन्हें अपने काम के लिए उद्योग का समर्थन प्राप्त है।
इसमें कहा गया है कि भारत में शोध प्रकाशनों के एक अध्ययन से, क्वांटम अनुसंधान में जापान, चीन, जर्मनी और अन्य देशों से विदेशी राशि मिलने का पता चलता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भारत में शोध प्रकाशनों में अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण का पहलू भारतीय और अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के बीच सहयोग को उजागर करता है, लेकिन यह शोध सुरक्षा के बारे में चिंताओं की ओर भी इशारा कर सकता है।’’
प्रोफेसर सूद ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए क्वांटम हार्डवेयर में निवेश की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा, ‘‘हमें स्टार्टअप के लिए और अधिक धनराशि लाने और निवेश को जोखिम मुक्त करने की आवश्यकता है, जिसका मतलब है कि हमें उत्पादों के लिए बाजार बनाने की आवश्यकता है। और यही वह जगह है जहां सभी पक्ष, चाहे वह सरकार हो, निजी क्षेत्र हो, शिक्षा जगत हो या स्टार्टअप हो, इस परिवेशी तंत्र को बनाने में भूमिका निभाते हैं।’’
प्रोफेसर सूद ने कहा, ‘‘क्वांटम प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक मानकों को परिभाषित करने में हमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह एक ऐसा अंतर है जिसे हमें भरना होगा क्योंकि एक बार जब हम ऐसा कर लेंगे, तो हम मानकीकरण प्रयासों में भी भूमिका निभाएंगे, और यही हमें रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जाएगा।’’
भाषा संतोष