थर्मोन्यूक्लियर अनुसंधान, उत्तरी सागर की पारगमन क्षमता पर चर्चा कर रहे भारत और रूस : रोसातोम सीईओ
जितेंद्र पवनेश
- 12 Mar 2024, 04:51 PM
- Updated: 04:51 PM
(हैरी एम पिल्लई)
तिरुवनंतपुरम, 12 मार्च (भाषा) भारत और रूस नियंत्रित थर्मोन्यूक्लियर संलयन (फ्यूजन) पर अनुसंधान और उत्तरी सागर मार्ग की पारगमन क्षमता को संयुक्तरूप से विकसित करने सहित कई गतिविधियों पर सहयोग के लिए चर्चा कर रहे हैं। मास्को में सरकारी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रोसातोम के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी।
रोसातोम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ए.ई. लिखाचेवा ने कहा कि भारत के साथ चर्चा का मुख्य विषय परमाणु प्रौद्योगिकियों और गैर-ऊर्जा व गैर-परमाणु क्षेत्रों में भावी सहयोग की संभावनाओं को तलाशना है।
तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (केएनपीपी) का पिछले महीने दौरा करने वाले लिखाचेवा ने कहा कि दोनों पक्षों ने केएनपीपी की पहली इकाइयों के निर्माण के दौरान सहयोग में व्यापक अनुभव प्राप्त किया है।
लिखाचेवा ने ईमेल के माध्यम से साक्षात्कार में 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''भारत के साथ हमारा सहयोग पहले ही सीमाओं के परे पहुंच चुका है। बांग्लादेश में पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र 'रूपपुर एनपीपी' बनाने के लिए भारतीय कंपनियां रोसातोम की परियोजना में भागीदारी कर रही हैं।''
इसके अलावा, रोसातोम गतिविधियों के लिए बड़ी संख्या में नये क्षेत्र विकसित करने में जुटा है। इनकी संख्या 80 के आस-पास है। इनमें से कई में विकास गतिविधियों को वह अपने मित्र देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार, हम भारतीय पक्ष को कम-शक्ति वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण में अपनी दक्षताओं की पेशकश कर सकते हैं
लिखाचेवा का मानना है कि दोनों देशों में नियंत्रित थर्मोन्यूक्लियर संलयन के विषय सहित वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग की काफी संभावनाएं हैं।
लिखाचेवा ने कहा कि रोसातोम, भारतीय वैज्ञानिकों को रूस में वर्तमान में निर्माणाधीन 'मल्टीपर्पज फास्ट न्यूट्रॉन रिसर्च रिएक्टर' (एमबीआईआर) में अनुसंधान करने का अवसर प्रदान करने के लिए भी तैयार है।
उन्होंने कहा, '' यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली अनुसंधान रिएक्टर होगा। यह चिकित्सा विषयों, मौलिक व अनुप्रयुक्त भौतिकी के क्षेत्र में शोध के साथ-साथ नयी सामग्री की रचना में व्यापक काम करने का अनूठा अवसर खोलेगा।''
इसके अलावा रूस, उत्तरी सागर मार्ग की पारगमन क्षमता के संयुक्त विकास पर भी भारत के साथ चर्चा कर रहा है।
इस मार्ग का संचालन रोसातोम द्वारा किया जाता है।
अगर सब कुछ ठीक रहता है तो उक्त मार्ग के माध्यम से भारत को रूसी तेल, कोयला और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में मदद मिलेगी।
भाषा जितेंद्र