वैश्विक प्लास्टिक संधि: ओटावा में मामूली प्रगति से नागरिक समाज निराश
नोमान पवनेश
- 01 May 2024, 08:48 PM
- Updated: 08:48 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने के वास्ते अंतरराष्ट्रीय संधि के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रायोजित वार्ता का चौथा चरण कनाडा के ओटावा में मंगलवार को संपन्न हो गया। बातचीत में मामूली प्रगति हुई है, जिससे महात्वाकांक्षी राष्ट्रों और ज्यादातर नागरिक समाज से जुड़े लोगों को निराशा हुई है।
जलवायु, जैवविविधता और प्रदूषण संकट को बढ़ाने वाले प्लास्टिक के उत्पादन की भूमिका पर चर्चा नहीं करने के फैसले को लेकर नागरिक समाज का कहना है कि ओटावा वार्ता जीवाश्म ईंधन और पेट्रोकेमिकल उद्योग के हितों में झुक गई।
देशों ने अंतर-सत्रीय कार्य पर आगे बढ़ने का फैसला किया, जिसमें अंतर सरकारी वार्ता समिति (आईएनसी) के वित्तीय तंत्र, प्लास्टिक उत्पाद, प्लास्टिक में चिंताजनक रसायन, उत्पाद का डिजाइन, पुन: इस्तेमाल और पुनर्चक्रण पर आधिकारिक सत्रों के बीच विशेषज्ञ बैठकें शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा, “प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दुनिया को अपनी चपेट में ले रहा है और हमारे पास अब इस साल के अंत की समय सीमा पूरी होने में कुछ महीने बचे हैं, जिसपर हम 2022 में सहमत हुए थे। मैं सदस्यों से अधिकतम लक्ष्य हासिल करने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता और लचीलापन दिखाने का आग्रह करती हूं।”
ज्यादातर नागरिक समाज का मानना है कि मसौदा मूल पाठ इस वर्ष 25 नवंबर से एक दिसंबर तक दक्षिण कोरिया के बुसान में होने वाली पांचवीं और अंतिम वार्ता के लिए उपयुक्त नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ‘एन्वायरन्मेंटल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी’ ने कहा कि प्राथमिक प्लास्टिक पॉलिमर के उत्पादन पर चर्चा को शामिल नहीं करने के बेहद निराशाजनक निर्णय के साथ वार्ता समाप्त हुई। पॉलिमर प्लास्टिक प्रदूषण का अहम स्रोत है।
सदस्य राष्ट्र इस कार्य के दौरान पर्यवेक्षकों की भागीदारी को शामिल करने पर सहमत हुए। उन्होंने एक कानूनी प्रारूप समूह बनाने का भी निर्णय लिया, जो मूल पाठ की कानूनी समीक्षा करेगा और पूर्ण सत्र को सिफारिशें प्रदान करेगा।
ओटावा में हुई वार्ता पर नज़र रखने वाले विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने प्राथमिक प्लास्टिक पॉलिमर या वर्जिन प्लास्टिक पर किसी भी सीमा का विरोध किया और दलील दी कि उत्पादन में कटौती संयुक्त राष्ट्र पर्यवारण असेम्बली (यूएनईए) के प्रस्ताव में निर्धारित सीमा से अधिक है।
भाषा
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