सेवानिवृत्ति के बाद समय पर सरकारी आवास खाली कर दूंगा : प्रधान न्यायाधीश गवई
प्रशांत सुरेश
- 07 Aug 2025, 10:36 PM
- Updated: 10:36 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई ने बृहस्पतिवार को कहा कि समय की कमी के कारण वह नवंबर में सेवानिवृत्त होने तक उपयुक्त आवास नहीं ढूंढ पाएंगे, लेकिन नियमों के तहत निर्धारित समयावधि के भीतर अपना सरकारी आवास खाली करना निश्चित है।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में निवर्तमान न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया को विदाई देते हुए सीजेआई ने उन्हें एक “गर्मजोशी भरा व्यक्ति” कहा, जिन्होंने अपना करियर न्यायपालिका को समर्पित कर दिया। न्यायमूर्ति धूलिया नौ अगस्त को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
वरिष्ठ वकीलों और उनके परिवार के सदस्यों के अलावा शीर्ष न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति धूलिया अपनी सेवानिवृत्ति के एक दिन बाद अपना सरकारी आवास खाली कर देंगे।
सीजेआई ने कहा, “न्यायपालिका में उनके योगदान को हम हमेशा याद रखेंगे। सेवानिवृत्ति के बाद, वे दिल्ली में रहेंगे और उन न्यायाधीशों में से एक होंगे जो तुरंत अपना आवास खाली कर देंगे। सेवानिवृत्ति के अगले दिन।”
दिलचस्प बात यह है कि एक महीने पहले, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर दिल्ली के कृष्ण मेनन मार्ग स्थित भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के आधिकारिक आवास को खाली कराने को कहा था। पत्र में यह उल्लेख किया गया कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ निर्धारित समयसीमा से अधिक समय तक उस आवास में ठहरे रहे थे।
हालांकि, अगस्त की शुरुआत में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सीजेआई का आधिकारिक आवास खाली कर दिया था।
अपनी और न्यायमूर्ति धूलिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “वास्तव में, यह दुर्लभ है। काश मैं भी 24 नवंबर तक ऐसा करने की स्थिति में होता। मुझे उपयुक्त घर ढूंढने का समय तो नहीं मिलेगा, लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि नियमों के अनुसार जो भी समय मिलेगा, उससे पहले ही मैं वहां से चला जाऊंगा, लेकिन न्यायमूर्ति धूलिया ने एक बहुत ही अच्छी मिसाल कायम की है। मुझे यकीन है कि हममें से कई लोग उनका अनुकरण कर सकते हैं।”
भाषा प्रशांत