आरक्षण संबंधी मुद्दे सुलझाने को महाराष्ट्र सरकार ने ओबीसी मामलों पर कैबिनेट उप-समिति गठित की
खारी देवेंद्र
- 03 Sep 2025, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
मुंबई, तीन सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कल्याणकारी उपायों में तेजी लाने और आरक्षण से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बुधवार को नौ सदस्यीय कैबिनेट उप-समिति का गठन किया।
यह कदम आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा मुंबई में अपना अनशन समाप्त किए जाने के एक दिन बाद उठाया गया है। राज्य सरकार ने जरांगे की अधिकांश मांगें मान ली हैं, जिनमें पात्र मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति का प्रमाणपत्र देना भी शामिल है, जिससे वे ओबीसी को मिलने वाले आरक्षण लाभों के पात्र बन सकेंगे।
इसी प्रकार की समिति के गठन का निर्णय पिछले सप्ताह हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था और बुधवार को इसे औपचारिक मंजूरी दे दी गई। इस समिति की अध्यक्षता राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले करेंगे।
राज्य में पहले से ही ओबीसी कल्याण के लिए एक अलग मंत्रालय है, जिसकी अध्यक्षता फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक कैबिनेट मंत्री कर रहे हैं।
सरकार के अनुसार, कैबिनेट उप-समिति में भाजपा के चार मंत्री तथा शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दो-दो मंत्री शामिल हैं।
कैबिनेट बैठक के बाद जारी एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) में कहा गया कि समिति में छगन भुजबल, दत्तात्रेय भरणे (राकांपा), संजय राठौड़, गुलाबराव पाटिल (शिवसेना) तथा गणेश नाइक, पंकजा मुंडे और अतुल सावे (भाजपा) को सदस्य बनाया गया है। समिति की अध्यक्षता भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले करेंगे।
ओबीसी विभाग के सचिव इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
कैबिनेट उप-समिति ओबीसी समुदाय के लिए कल्याणकारी उपायों को गति देने के साथ-साथ सरकार की ओर से उनके हितों के क्रियान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेगी और आवश्यक होने पर उनमें संशोधन की सिफारिश भी करेगी। साथ ही यह समिति यह भी जांचेगी कि सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल रहा है या नहीं।
सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि समिति को ओबीसी संगठनों के आंदोलनकारियों और उनके प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत करने का अधिकार भी दिया गया है।
मराठा समुदाय को आरक्षण देने के उद्देश्य से 2018 में लाया गया एक कानून उच्चतम न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया गया था, क्योंकि वह 1992 में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का उल्लंघन करता था। इसके बाद, 2022 में मराठा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर विचार हेतु एक अलग कैबिनेट उप-समिति का गठन किया गया था।
भाषा खारी