केरल के मंत्री शिवनकुट्टी ने नयी केंद्रीय श्रम नीति की आलोचना की, इसे 'श्रम विरोधी' बताया
तान्या माधव
- 30 Oct 2025, 05:18 PM
- Updated: 05:18 PM
तिरुवनंतपुरम, 30 अक्टूबर (भाषा) केरल के श्रम और सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार की नयी मसौदा श्रम नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “ श्रमिक-विरोधी” बताते हुए कहा कि यह राज्यों के अधिकारों को छीनने वाली नीति है।
यह बयान उन्होंने केंद्र के श्रम मंत्रालय द्वारा जारी नयी नीति ‘श्रम शक्ति नीति 2025’ के संदर्भ में दिया। मंत्री ने आरोप लगाया कि यह नीति संविधान में प्रदत्त श्रमिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की अवधारणा को पूरी तरह नकारती है।
शिवनकुट्टी ने कहा कि केरल सरकार इस नीति का दृढ़ता से विरोध करेगी, क्योंकि इसमें श्रमिक अधिकारों पर आधारित नीति दस्तावेज के लिए संविधान की जगह ‘मनुस्मृति’, ‘राजधर्म’ और ‘श्रमधर्म’ जैसे प्राचीन ग्रंथों और अवधारणाओं को आधार बनाया गया है।
उन्होंने कहा, “यह अत्यंत निंदनीय और प्रतिगामी कदम है। यह श्रमिकों को ‘अधिकारों संपन्न नागरिकों’’ के बजाय ‘आज्ञाकारी दासों’ में बदलने का एक छिपा हुआ प्रयास है। जाति आधारित श्रम विभाजन को सही ठहराने वाले विचारों को फिर से लाना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।”
मंत्री ने कहा कि रोजगार और श्रमिक कल्याण संविधान की समवर्ती सूची के विषय हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नयी मसौदा नीति राज्यों की पूरी तरह अनदेखी करती है और इसके माध्यम से “श्रम एवं रोजगार नीति मूल्यांकन सूचकांक” जैसे तंत्रों के जरिए राज्यों की रैंकिंग की जाएगी, ताकि केंद्र की कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियां राज्यों पर थोप सकें।
उन्होंने कहा, “यह संघीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।”
मंत्री ने यह भी कहा कि मसौदा नीति श्रमिकों की बुनियादी आवश्यकताओं — नौकरी की सुरक्षा, सम्मानजनक न्यूनतम वेतन और स्थायी रोजगार पर पूरी तरह मौन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नीति के तहत श्रम कानूनों के अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी को “नकली नियोक्ता” जैसी संकल्पना तक सीमित कर दिया गया है, जिससे प्रवर्तन तंत्र कमजोर हो जाएगा और श्रमिक क्षेत्र में शोषण बढ़ेगा।
शिवनकुट्टी ने कहा कि केरल श्रमिक कल्याण और अधिकारों की रक्षा में देश के लिए एक आदर्श राज्य है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस “श्रम-विरोधी और असंवैधानिक” मसौदा नीति को तुरंत वापस लिया जाए और सभी संबंधित पक्षों से परामर्श करके एक नयी नीति तैयार की जाए।
भाषा तान्या