अवामी लीग ने पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ अपराधों की जांच की मांग को लेकर आईसीसी का रुख किया
देवेंद्र रंजन
- 31 Oct 2025, 11:11 PM
- Updated: 11:11 PM
नयी दिल्ली/ढाका, 31 अक्टूबर (भाषा) बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग ने पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ अपराधों की जांच की मांग करते हुए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) का दरवाजा खटखटाया है।
अवामी लीग ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के खिलाफ बहुआयामी वैश्विक अभियान तेज कर दिया है।
पार्टी ने यूनुस पर “सुनियोजित साजिश” के तहत हिंसक विद्रोह के जरिए असंवैधानिक रूप से सत्ता हथियाने का आरोप लगाया है।
लंदन स्थित कानूनी फर्म ‘डॉटी स्ट्रीट चैंबर्स’ ने हेग स्थित आईसीसी में अवामी लीग का प्रतिनिधित्व किया था। इस फर्म ने पिछले सप्ताह खुलासा किया था कि उसने रोम संविधि के अनुच्छेद 15 के तहत एक याचिका दायर की है, जो आईसीसी अभियोजक को न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में अपराधों के बारे में प्राप्त जानकारी के आधार पर जांच शुरू करने की शक्ति प्रदान करती है।
कानूनी फर्म ने अपनी याचिका में ‘‘जुलाई 2024 से अवामी लीग के 400 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या के आरोपों को उजागर किया है, जिनमें से कई की हत्या हिंसक भीड़ द्वारा की गई है।”
चैंबर्स ने एक बयान में कहा, ‘‘यह मानने का उचित आधार है कि कथित अपराध मानवता के विरुद्ध अपराध हैं, जिनमें हत्या और उत्पीड़न शामिल हैं, जिसके लिए अभियोजक द्वारा जांच शुरू करना आवश्यक है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘यह संचार गवाहों के बयान (वीडियो साक्ष्य के साथ) द्वारा समर्थित है, जिसमें क्रूर हत्याओं का विवरण दिया गया है।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘इन अपराधों की बांग्लादेश में निष्पक्ष जांच या अभियोजन की कोई वास्तविक संभावना नहीं है और इसके परिणामस्वरूप दोषियों को दंडमुक्ति मिल जाएगी।”
बुधवार देर रात पार्टी के फेसबुक पेज पर अपलोड किए गए और बृहस्पतिवार को अन्य सोशल मीडिया मंचों द्वारा प्रचारित अपने नवीनतम ऑडियो बयान में, हसीना ने कहा कि अवामी लीग को ‘‘हमलों और अदालती मामलों के माध्यम से परेशान नहीं किया जा सकता है - इस बार यह साबित हो जायेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अवामी लीग बांग्लादेश की धरती और वहां के लोगों द्वारा बनाई गई पार्टी है।’’
हसीना (78) बांग्लादेश में कई मामलों का सामना कर रही हैं। उन्हें पिछले साल पांच अगस्त को देश में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल कर दिया गया था।
इसके बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार का पदभार संभाला था।
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