ईमेल हैक करने वालों ने डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज से 2.16 करोड़ रुपये अपने खाते में हस्तांतरित कराए
धीरज मनीषा
- 10 Nov 2025, 04:57 PM
- Updated: 04:57 PM
बेंगलुरु, 10 नवंबर (भाषा) साइबर धोखाधड़ी करने वालों ने बेंगलुरु स्थित ‘ग्रुप फार्मास्युटिकल्स’ और ‘डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, हैदराबाद’ के बीच आधिकारिक ईमेल संचार को कथित रूप से हैक करके 2.16 करोड़ रुपये अपने खाते में हस्तांतरित कर लिए।
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने हालांकि एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कंपनी की टीम और बैंकिंग साझेदारों द्वारा समय पर पता लगाने और त्वरित कार्रवाई के कारण, धनराशि को ‘फ्रीज’ कर दिया गया है और कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है।
बेंगलुरु शहर के साइबर अपराध पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, ग्रुप फार्मास्युटिकल्स के एक वरिष्ठ अधिकारी महेश बाबू के. ने धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई। कंपनी ने प्राथमिकी में कहा कि कुछ सामान की आपूर्ति करने के लिए उसे डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज से 2.16 करोड़ रुपये मिलने थे।
प्राथमिकी में कहा गया है कि तीन नवंबर को कुछ हैकर ने दोनों कंपनियों के बीच ईमेल संचार तक कथित तौर पर अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर ली और डॉ रेड्डीज की वित्त एवं लेखा टीम को फर्जी ईमेल भेजे जिनमें उन्होंने स्वयं को ‘ग्रुप फार्मास्युटिकल्स’ के अधिकारी बताकर अपने बैंक खाते के विवरण प्रदान किए।
इसमें कहा गया, ‘‘इसके परिणामस्वरूप डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज ने चार नवंबर को 2.16 करोड़ रुपये धोखाधड़ी वाले बैंक खाते में भेज दिए।’’
शिकायतकर्ता ने पुलिस से धोखाधड़ी वाले खाते को तुरंत ‘फ्रीज’ करने और गबन की गई राशि की वसूली करने का अनुरोध किया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर पांच नवंबर को अज्ञात साइबर धोखेबाजों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4) (धोखाधड़ी) एवं 319(2) (छद्मवेश द्वारा धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया।
अधिकारी ने शुरुआती जांच के हवाले से बताया कि धोखाधड़ी वाला खाता गुजरात के वडोदरा में पाया गया है और जिस प्राथमिक खाते में धोखाधड़ी की राशि हस्तांतरित की गई थी, उसे ‘फ्रीज’ कर दिया गया है। पुलिस ने कहा कि मामले की आगे जांच की जा रही है।
डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज ने दावा किया, ‘‘इस घटना में एक विक्रेता के ईमेल पते की नकल करके एक वैध भुगतान को पुनर्निर्देशित करने का प्रयास किया गया था। हमारी टीम और बैंकिंग साझेदारों द्वारा समय पर पता लगाने और त्वरित कार्रवाई करने से, धनराशि की निकासी रोक दी गई है और कंपनी या विक्रेता को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है।’’
भाषा धीरज