लखनऊ में रविवार से शुरू होगा राष्ट्रीय जंबूरी, 32,000 स्काउट एवं गाइड के शामिल होने की संभावना
आनन्द पवनेश संतोष
- 21 Nov 2025, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
लखनऊ, 21 नवंबर (उप्र) लखनऊ के वृंदावन कॉलोनी स्थित ‘डिफेंस एक्सपो ग्राउंड’ में 19वें भारत स्काउट एवं गाइड के राष्ट्रीय जंबूरी की शुरुआत रविवार 23 नवंबर से होगी और यह आयोजन 29 नवंबर तक चलेगा। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान के अनुसार 61 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश इस प्रतिष्ठित ‘हीरक जयंती’ संस्करण की मेजबानी कर रहा है, जो राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण है। ‘भारत स्काउट एवं गाइड’ की स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण हो गए हैं।
300 एकड़ में फैले जंबूरी परिसर में 32,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इन प्रतिभागियों के अलावा 3,000 स्टाफ सदस्यों के लिए परिसर को तैयार किया जा रहा है।
नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा लेंगे, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को इसका स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।”
उन्होंने आवास, स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी तक हर व्यवस्था को सर्वोत्तम मानक के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया।
सुगम व्यवस्थाओं के लिए परिसर में 16 जर्मन हैंगर, 600 वाटर टैंक, 30 आरओ प्वाइंट, 2,200 से अधिक शौचालय, 100 रसोईघर और चार केंद्रीय रसोईघर स्थापित किए जा रहे हैं, जो प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराएंगे।
अस्थायी थाना, 3,500 क्षमता वाला कॉन्फ्रेंस हॉल और दमकल विभाग की 11 गाड़ियां भी सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करेंगी।
जंबूरी में देशभर से आए कैडेट ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रदर्शित करते हुए उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विविध व्यंजनों का आनंद लेंगे।
यह आयोजन लखनऊ में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां हजारों श्रमिकों, ठेकेदारों और छोटे विक्रेताओं को अवसर मिल रहे हैं।
सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक प्रगति का यह संगम जंबूरी को प्रतिभागियों और शहर, दोनों के लिए यादगार बना रहा है।
भाषा आनन्द पवनेश