उच्चतम न्यायालय ने एल्गार परिषद मामले में गौतम नवलखा को जमानत दी
आशीष दिलीप
- 14 May 2024, 10:24 PM
- Updated: 10:24 PM
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में समय लगने की बात पर गौर करते हुए मंगलवार को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में कार्यकर्ता गौतम नवलखा को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी ने मामले में नवलखा की जमानत पर बंबई उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक को बढ़ाने से इनकार कर दिया।
न्यायालय ने नवलखा को नजरबंदी के दौरान सुरक्षा के लिए खर्च के तौर पर 20 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश भी दिया। पीठ ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया हमारा विचार है कि रोक के अंतरिम आदेश को बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ता चार साल से अधिक समय से कैद में है और अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं।’’
पीठ ने कहा, ‘‘मुकदमा पूरा होने में कई साल लगेंगे। इसलिए, विवादों पर विस्तार से गौर किए बिना, हम रोक को आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं।’’
नवलखा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नित्या रामकृष्णन ने कहा कि कार्यकर्ता चार साल से अधिक समय से जेल में हैं और अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने जमानत देने का विरोध करते हुए दलील दी कि 1.75 करोड़ रुपये की राशि अभी भी लंबित है, जिसे नवलखा को सुरक्षा खर्च के हिस्से के रूप में भुगतान करना है।
राजू ने कहा कि नवलखा के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देकर गलती की।
शीर्ष अदालत ने कहा कि नवलखा चार साल से अधिक समय से जेल में हैं और मामले में अब तक आरोप तय नहीं किये गये हैं।
बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल 19 दिसंबर को नवलखा को जमानत दे दी थी, लेकिन इसके बाद एनआईए ने शीर्ष अदालत में अपील दायर करने के लिए समय मांगा, जिसके चलते उच्च न्यायालय ने अपने आदेश पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने अगस्त 2018 में गिरफ्तार किए गए नवलखा को पिछले साल नवंबर में घर में नजरबंद करने की अनुमति दी थी। वह फिलहाल नवी मुंबई में रह रहे हैं।
यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए जाने से संबंधित है। पुलिस का दावा है कि इसके अगले दिन कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी थी। मामले में 16 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और उनमें से पांच फिलहाल जमानत पर हैं।
भाषा आशीष