मणिपुर : प्रदर्शनकारियों ने कुकी-जोमी समुदाय के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की
संतोष
- 22 Jan 2026, 10:05 PM
- Updated: 10:05 PM
चूड़ाचांदपुर, 22 जनवरी (भाषा) मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले में बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने यौन हिंसा और हत्या के पीड़ित कुकी-जोमी समुदाय के लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप की मांग की।
जिले के तुइबोंग में महिलाओं ने यह धरना प्रदर्शन ऐसे समय में किया है जब कुछ दिन पहले ही सामूहिक बलात्कार की पीड़ित कुकी समुदाय की एक महिला की अवसाद के कारण मौत हो गई थी। मणिपुर में मई 2023 में भड़की हिंसा के दौरान इस महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था।
कुकी महिला मानवाधिकार संगठन (केडब्ल्यूओएचआर) और स्वदेशी जनजातीय नेता मंच (आईटीएलएफ) की महिला शाखा के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
उन्होंने मांग की कि प्रशासन हिंसा के दौरान राज्य में कुकी-जोमी महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं और उनकी हत्याओं में शामिल लोगों को गिरफ्तार करे और उन पर मुकदमा चलाए।
चूड़ाचांदपुर के उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को सौंपे गए एक ज्ञापन में दोनों संगठनों ने प्रधानमंत्री से 'तत्काल' हस्तक्षेप करने की मांग की।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपने ज्ञापन में कहा कि मणिपुर संकट के दौरान कुकी-जोमी महिलाओं के खिलाफ की गई व्यवस्थित यौन हिंसा, क्रूर हत्याओं और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह जांच की भी मांग की, जिसमें सीबीआई और अन्य एजेंसियों की कड़ी निगरानी शामिल है।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपने ज्ञापन में कहा, '' मई 2023 से नवंबर 2024 के बीच, मणिपुर में कम से कम कुकी-जोमी समुदाय की 29 महिलाओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पीड़ितों में युवा महिलाएं, बुजुर्ग महिलाएं और यहां तक कि एक मानसिक रूप से दिव्यांग महिला भी शामिल है।''
ज्ञापन में कहा गया है कि मणिपुर संकट के दौरान कुकी-जोमी महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के सभी मामलों को मानवता के खिलाफ अपराध के तहत देखा जाना चाहिए।
मई 2023 में हिंसा भड़कने के बाद से कुकी और मेइती समुदाय के लोग एक-दूसरे के इलाकों में जाने से कतराते हैं, जिससे राज्य जातीय आधार पर बुरी तरह विभाजित हो गया है। इस संघर्ष में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
भाषा रवि कांत रवि कांत संतोष
संतोष
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