भारत और यूरोपीय संघ ने रक्षा क्षेत्र में समझौते पर हस्ताक्षर किए
माधव
- 27 Jan 2026, 10:32 PM
- Updated: 10:32 PM
नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को एक महत्वाकांक्षी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत आतंकवाद रोधी सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में गहन भागीदारी और सैन्य उपकरणों का संयुक्त विकास किया जाएगा।
यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन व यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा के बीच भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन वार्ता के बाद किया गया।
यह विशाल रक्षा समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा नीति को लेकर यूरोप में बढ़ती चिंता की पृष्ठभूमि में हुआ है।
जापान और दक्षिण कोरिया के बाद भारत एशिया का तीसरा देश है, जिसके साथ यूरोपीय संघ ने ऐसा रक्षा समझौता किया है।
मोदी ने कहा, "रक्षा एवं सुरक्षा किसी भी मजबूत साझेदारी की नींव हैं। आज हम इस सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के माध्यम से इसे आधिकारिक रूप दे रहे हैं।"
प्रधानमंत्री ने एक बयान में कहा, "इससे हमें आतंकवाद रोधी गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर अधिक निकटता से काम करने में मदद मिलेगी। यह नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।"
उन्होंने कहा, "हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारा सहयोग बढ़ेगा और हमारी रक्षा कंपनियों को सह-विकास व सह-उत्पादन पर मिलकर काम करने के नए अवसर मिलेंगे।"
अधिकारियों ने बताया कि यह समझौता भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ के सिक्योरिटी एक्शन फॉर यूरोप (सेफ) कार्यक्रम में शामिल होने के द्वार खोलेगा। 'सेफ', यूरोपीय संघ का 150 अरब यूरो का वित्तीय साधन है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों को रक्षा तैयारियों में तेजी लाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए रक्षा एवं सुरक्षा समझौते के महत्व को समझाया।
उन्होंने बताया, "चूंकि हमारी कई यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी साझेदारियां हैं इसलिए यह ढांचागत समझौता अपनी तरह का पहला समझौता होगा। इससे समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और साइबरस्पेस में हमारी भागीदारी को मजबूती मिलेगी।"
भाषा जितेंद्र माधव
माधव
2701 2232 दिल्ली