न्यायालय सांसदों, विधायकों के खिलाफ मामले वापस लेने संबंधी हिप्र की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत
दिलीप
- 07 Feb 2026, 04:50 PM
- Updated: 04:50 PM
नयी दिल्ली, सात फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने को लेकर सहमति जताई है, जिसमें सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज 45 मामलों को वापस लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। इनमें कोविड महामारी के दौरान रैलियां करने पर पिछली भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार के समय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामले भी शामिल हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के 26 अप्रैल, 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य के मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने की अनुमति नहीं दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल 15 मामलों को वापस लेने की अनुमति दी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि गृह विभाग द्वारा वापस लेने की सिफारिश किए गए 65 मामलों में से पांच मामलों का याचिका लंबित रहने के दौरान निपटारा किया गया। इन पांच मामलों में मुख्यमंत्री सुक्खू के खिलाफ एक मामला भी शामिल है।
शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वी गिरी ने उच्चतम न्यायालय से जनहित में मामलों को वापस लेने की अनुमति मांगी। उन्होंने बताया कि यह फैसला जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों से सलाह लेकर, लोक अभियोजकों और जिला वकीलों की स्वतंत्र राय के बाद लिया गया है।
पीठ ने एक नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई 16 मार्च के लिए तय की।
उच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल, 2024 को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 269 (जीवन के लिए खतरनाक बीमारी के संक्रमण फैलने की संभावना वाले लापरवाही भरे कार्य), 353 (लोक सेवक को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के लिए उन पर हमला करना या आपराधिक बल का इस्तेमाल), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), धारा 506 (आपराधिक धमकी), और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं के तहत अपराधों से संबंधित मामलों को वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि हालांकि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 321 के अनुसार, मुकदमा वापस लेने से पहले उच्च न्यायालय की अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत सरकार (2020) मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर ऐसी अनुमति अनिवार्य हो गई है, जहां आरोपी पूर्व विधायक थे।
भाषा आशीष दिलीप
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