लाभ-साझाकरण ढांचा: जैविक संसाधनों के इस्तेमाल के लिए एनबीए को 45 दिन में 2.4 करोड़ रुपये मिले
नरेश
- 13 Feb 2026, 06:45 PM
- Updated: 06:45 PM
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) को पिछले 45 दिन में उन कंपनियों से 2.4 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं, जिन्होंने उसके पहुंच एवं लाभ-साझाकरण (एबीएस) ढांचे के तहत वाणिज्यिक या अनुसंधान उद्देश्यों के लिए विभिन्न जैविक संसाधनों का इस्तेमाल किया। वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
एनबीए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक और नियामक निकाय है। उसका एबीएस ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि जब कंपनियां या व्यक्ति पौधों और सूक्ष्मजीवों जैसे जैविक संसाधनों का इस्तेमाल करें, तो उससे हासिल होने वाले लाभ स्थानीय समुदायों और किसानों के साथ समान रूप से साझा किए जाएं, जो इन संसाधनों का संरक्षण करते हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "लाभ-साझाकरण ढांचे के तहत विभिन्न कृषि जैविक संसाधनों के इस्तेमाल से वित्तीय योगदान हासिल हुआ, जिनमें धान, प्याज, करेला, सरसों, कपास, लौकी, बैंगन, मिर्च, खीरा, भिंडी, तोरी, टमाटर और समुद्री शैवाल की किस्में एवं हाइब्रिड प्रजातियां शामिल हैं।"
उन्होंने बताया कि सरसों और धान की हाइब्रिड किस्मों के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पायनियर ओवरसीज कॉर्पोरेशन से 2.30 करोड़ रुपये मिले, जबकि बाकी राशि ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड, टोकिटा सीड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एवलो इंक और सीए6 एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से हासिल हुई।
अधिकारी के मुताबिक, "इन जैविक संसाधनों का इस्तेमाल उन्नत और हाइब्रिड बीज किस्मों सहित कृषि आधारित उत्पादों के उत्पादन के लिए किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कृषि अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला।"
उन्होंने बताया कि एनबीए को वित्तीय वर्ष 2025-2026 में बीज क्षेत्र से एबीएस ढांचे के तहत 3.2 करोड़ रुपये हासिल हुए।
अधिकारी के अनुसार, "बीज क्षेत्र एबीएस ढांचे के तहत एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। हालांकि, प्राधिकरण सभी हितधारकों, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं, को जैव विविधता अधिनियम 2002 के प्रावधानों का पालन करने और जैव विविधता संरक्षण प्रयासों एवं समान लाभ-साझाकरण में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।"
भाषा पारुल नरेश
नरेश
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