टीवीके ने खुद को तमिलनाडु में एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित कर लिया है: विजय
नरेश
- 13 Feb 2026, 06:57 PM
- Updated: 06:57 PM
सलेम (तमिलनाडु), 13 फरवरी (भाषा) तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) प्रमुख विजय ने शुक्रवार को दावा किया कि उनकी पार्टी ने अपनी स्थापना के केवल दो साल के भीतर तमिलनाडु की प्रमुख ताकत के रूप में खुद को स्थापित कर लिया है और जनता में इसका समर्थन आधार 30 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है।
विजय ने कहा कि वह यह साबित करेंगे कि जनता से प्रेम करने वालों के लिए सुशासन संभव है।
उन्होंने प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं को चुनौती दी कि वे अपनी खुद की पार्टी बनाएं और कम से कम एक प्रतिशत मत हासिल करके दिखायें।
विजय ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि टीवीके की स्थापना न तो किसी पार्टी को खत्म करने के लिए की गई थी और न ही उनके मन में किसी के प्रति कोई व्यक्तिगत द्वेष या आक्रोश था।
उन्होंने कहा, ''हम राजनीति में इसलिए आए हैं ताकि हम जनता की सेवा करके उनका आभार व्यक्त कर सकें; हमारा उद्देश्य लोगों के बीच नफरत फैलाना या विरोध की राजनीति करना नहीं है।''
विजय ने कहा कि जो प्रतिद्वंद्वी टीवीके को किसी पार्टी की ''बी-टीम'' कहते हैं, वे केवल अपनी अक्षमता को छिपाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने पूछा, ''सत्ता का दुरुपयोग करके लोगों का पैसा लूटने के अलावा, क्या उनके पास कोई और अनुभव है?''
उन्होंने कहा कि सुशासन के लिए केवल ''जनता से प्रेम करने का अच्छा गुण'' ही आवश्यक है और इस गुण से लैस होकर ''हम वास्तव में एक उत्कृष्ट शासन प्रदान कर सकते हैं।''
विजय ने उन स्थापित पार्टियों के नेताओं को चुनौती दी जिनकी स्थापना उन्होंने नहीं की थी और पूछा कि क्या उनमें उनके समान अपनी पार्टी शुरू करने और यह साबित करने का साहस और क्षमता है कि वे कम से कम एक प्रतिशत मत हासिल कर सकें।
उन्होंने दावा किया कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों ही गठबंधन पार्टियों पर पूरी तरह से निर्भर थीं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने अकेले दम पर दो वर्षों में तमिलनाडु में द्रविड़ पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए एक प्रमुख ताकत के रूप में उभर कर अपनी पहचान बनाई है।
विजय ने पूछा कि जनता के बीच टीवीके का समर्थन आधार ''30 प्रतिशत'' से अधिक हो गया है, तो क्या यह कहना सही है कि ऐसी पार्टी के पास अनुभव नहीं है?
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ''हमें लूटपाट का बिल्कुल भी अनुभव नहीं है और हम इसे कभी सीखेंगे भी नहीं।''
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश
1302 1857 सलेम