'निसार' उपग्रह देशभर में हर 13 दिन में भूमि में नमी का डेटा उपलब्ध कराएगा: इसरो
माधव
- 14 Feb 2026, 06:44 PM
- Updated: 06:44 PM
बेंगलुरु, 14 फरवरी (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को कहा कि 'निसार' (एनआईएसएआर) उपग्रह भारतीय भूभाग की एस और एल बैंड के जरिये व्यवस्थित रूप से निगरानी कर रहा है ताकि हर 12 दिन बाद उच्च-रिजॉल्यूशन के साथ विस्तृत क्षेत्र का डेटा प्राप्त किया जा सके।
इस डेटा का प्रभावी ढंग से उपयोग 100 मीटर के उच्च रिजॉल्यूशन के साथ मृदा संबंधी नमी की जानकारी को दर्शाने में किया गया है।
अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि फसलों की गुणवत्ता, सिंचाई की जरूरतों और सूखे के जोखिम के प्रमुख संकेतक के रूप में, मृदा की नमी भारत में कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसरो के एक बयान के अनुसार, एस और एल बैंड से प्राप्त डेटा का उपयोग करके प्रदर्शित की गई मृदा-आर्द्रता से जुड़ी जानकारी भारत के विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों - सिंचित मैदानों और वर्षा आधारित खेतों से लेकर अर्ध-शुष्क और उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों तक - में सुसंगत अनुमान प्रदान करने में सहायता करती है।
इसमें कहा गया है कि अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी-आईएसआरओ) में विकसित भौतिकी-आधारित मृदा आर्द्रता पुनर्प्राप्ति एल्गोरिदम वैज्ञानिक मजबूती, विश्वसनीयता और परिचालन सटीकता सुनिश्चित करता है।
इसरो ने कहा, ''हर 12 दिनों में दो अवलोकन प्रदान करने की क्षमता के साथ, 'नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार' (एनआईएसएआर) मृदा में नमी की गतिशीलता की लगभग वास्तविक समय में निगरानी करने में सक्षम है। यह नियमित निगरानी सिंचाई योजना, सूखे से निपटने की तैयारी, कृषि-मौसम संबंधी सलाह और क्षेत्रीय जल संसाधन प्रबंधन में जिलों और कृषि समुदायों के लिए प्रासंगिक रूप से सहायता करती है।'' नासा अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी का नाम है।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यों का समर्थन करने के लिए 100 मीटर के आधार लेवल‑-चार स्तर का मिट्टी में ‑नमी संबंधी डेटा राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र में व्यवस्थित रूप से तैयार किया जाएगा और भूनिधि पोर्टल के माध्यम से देश भर के किसानों, योजनाकारों, शोधकर्ताओं, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा। भमि में नमी को हर 12 दिन में दो बार मापा जाएगा।
भाषा संतोष माधव
माधव
1402 1844 बेंगलुरु