शीर्ष अदालत ने धनशोधन मामले में भूषण स्टील के पूर्व प्रवर्तक की जमानत याचिका पर ईडी से जवाब मांगा
अमित रंजन
- 25 Jun 2024, 08:35 PM
- Updated: 08:35 PM
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 46,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी से उत्पन्न धनशोधन मामले में भूषण स्टील के पूर्व प्रवर्तक नीरज सिंघल की जमानत याचिका पर सुनवायी के लिए मंगलवार को सहमति व्यक्त की।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया और उनकी याचिका पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
सिंघल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आठ जनवरी के आदेश के खिलाफ अपील की है, जिसमें उनकी जमानत याचिका और मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि गिरफ्तार किये जाने के समय इसके आधार को लिखित रूप में प्रस्तुत करने को अनिवार्य बनाने का उच्चतम न्यायालय का फैसला, इस मामले में सिंघल के पकड़े जाने के बाद आया था। इसिलये इस गिरफ्तारी को अवैध नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी के आधार के बारे में मौखिक संचार धनशोधन रोधी अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19(1) के प्रावधानों का उचित अनुपालन था।
सिंघल भूषण स्टील के पूर्व प्रबंध निदेशक भी हैं और उन्हें 9 जून, 2023 को गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने अपने खिलाफ ईडी की कार्रवाई का विरोध करते हुए दावा किया कि उन्हें उनकी गिरफ्तारी के आधार के बारे में सूचित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह कानून के विपरीत है।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि केवल इसलिए कि 'गिरफ्तारी के आधार' वाले दस्तावेज के प्रत्येक पृष्ठ पर याचिकाकर्ता द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए गए थे, उक्त दस्तावेज़ के अस्तित्व पर अविश्वास करने या इस तथ्य को नकारने का कारण नहीं हो सकता कि गिरफ्तारी के आधार याचिकाकर्ता को दिखाए गए थे।
ईडी ने उच्च न्यायालय के समक्ष आरोप लगाया था कि सिंघल सबसे बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी में से एक में शामिल थे, साथ ही धनशोधन के अपराध में भी शामिल थे, जिससे 46,000 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक धन का नुकसान हुआ।
उसने आरोप लगाया गया है कि सिंघल ने अन्य आरोपियों की मिलीभगत से जानबूझकर भूषण स्टील लिमिटेड और अन्य समूह कंपनियों के नाम पर "अवैध’’ ऋण लेने में शामिल थे और 150 से अधिक कंपनियों के एक जटिल जाल के माध्यम से अपराध की आय के शोधन में लिप्त हुए।
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अमित