नेत्रहीनों के लिए भी किया जाए विश्व स्तरीय अवसंरचना का निर्माण : भाजपा सदस्य डॉ परमार
माधव
- 30 Mar 2026, 01:40 PM
- Updated: 01:40 PM
नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) विश्व स्तरीय अवसंरचना बना रही सरकार से नेत्रहीनों के लिए उनके अनुकूल अवसंरचना बनाने की मांग करते हुए सोमवार को भाजपा के सदस्य डॉ परमार जसवंतसिंह सालमसिंह ने कहा कि घर से पढ़ने या काम करने के लिए निकलने के बाद यह लोग वापस सुरक्षित घर पहुंच जाएं, यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
शून्यकाल में उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी के डॉ परमार जसवंतसिंह सालमसिंह ने दावा किया कि आज देश में करीब डेढ़ करोड़ लोग पूरी तरह अंधे हैं और करीब 3.7 करोड़ से 6.2 करोड़ लोग मामूली से लेकर गंभीर नेत्रहीनता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों की दैनिक सुरक्षा बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि देश में तेजी से विश्व स्तरीय अवसंरचना का निर्माण हो रहा है और जीवन आसान हो रहा है है तथा हम विकसित भारत की ओर कदम बढ़ा रहा है। ''लेकिन शहरों की सड़कों पर एक शांत लेकिन गंभीर खतरा मौजूद है।''
सिंह ने कहा ''लेकिन नेत्रहीनता की समस्या से ग्रस्त लोगों को जब भी काम के लिए या छात्रों को अध्ययन के लिए निकलना पड़ता है तब उन्हें जानलेवा स्थिति का सामना करना पड़ता है।''
उन्होंने कहा कि दिव्यांग लोगों के फुटपाथ 'टैक्टाइल पाथवे' या 'टैक्टाइल पेविंग' पर अतिक्रमण होता है, उनके रैंप टूटे हुए, अवैज्ञानिक तरीके से बनाए हुए या अतिक्रमित होते हैं।''
नेत्रहीनों (दृष्टिबाधित लोगों) के लिए बनाए गए खास फुटपाथ को टैक्टाइल पाथवे या टैक्टाइल पेविंग कहा जाता है। यह फुटपाथ पर लगी खास तरह की उभरी हुई टाइलें होती हैं, जिन्हें छूकर या पैरों के नीचे महसूस करके नेत्रहीन व्यक्ति रास्ता पहचान सकते हैं। यह टेक्टाइल पाथवे नेत्रहीनों को सुरक्षित दिशा देने के लिए सड़क पार करने, मोड़ या बाधा पहचानने में मदद करता हे।
डॉ परमार जसवंतसिंह और सालमसिंह ने कहा कि नेत्रहीनों की और भी समस्याएं हैं। ''ट्रैफिक सिग्नल मे उन्हें दिक्कत होती है क्योंकि उनके लिए ऑडिबल पेडेस्ट्रियन ट्रैफिक सिग्नल (पैदल यात्रियों के लिए श्रवण योग्य यातायात संकेत) की व्यवस्था नहीं है। वह लोग देख नहीं सकते, लेकिन सुन तो सकते हैं। किंतु ऑडिबल पेडेस्ट्रियन ट्रैफिक सिग्नल के अभाव में, ऐसे लोगों को सड़क पार करने में बड़ी दिक्कत होती है।''
उन्होंने मांग की कि दिव्यांग नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ''हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि विश्व स्तरीय अवसंरचना का निर्माण उनके लिए भी हो और जीवन आसान हो ।''
भाषा मनीषा माधव
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