रेखा गुप्ता ने 200 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया
पारुल
- 17 Apr 2026, 06:41 PM
- Updated: 06:41 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 'स्वच्छ, हरित एवं सतत' परिवहन प्रणाली की प्रतिबद्धता जताते हुए शुक्रवार को पूर्वी विनोद नगर डिपो से 200 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
रेखा ने कहा कि उनकी सरकार दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से लैस करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने ई-वाहनों की बैटरियों का सुरक्षित तरीके से निस्तारण करने के लिए होलंबी कलां क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक कचरा निपटान संयंत्र भी स्थापित करने का एलान किया।
उन्होंने कहा कि इन बसों के शामिल होने से राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन के बेड़े में शामिल कुल 6,300 बसों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 4,550 हो गई है।
रेखा ने दिल्ली-रोहतक अंतरराज्यीय बस सेवा को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और मदनपुर खादर बस टर्मिनल एवं पूर्वी विनोद नगर डिपो में एक नये भवन का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि ई-बसें विकसित दिल्ली के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेंगी और प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में भी मददगार होंगी।
रेखा ने कहा कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) हर महीने नयी बसें चला रहा है या नये कार्यालयों का उद्घाटन कर रहा है।
उन्होंने कहा, ''हमारी सरकार दिल्ली में बेहतर सरकारी कार्यालयों के लिए काम कर रही है, जिससे अंततः एक बेहतर शहर के निर्माण में मदद मिलेगी।''
रेखा ने दावा किया कि दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन नीति देश में सबसे प्रभावी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी पिछले कई वर्षों से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, लेकिन पिछली सरकारों ने कोई उचित योजना नहीं बनाई।
मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर कहा, ''हमारी सरकार दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से ईवी से लैस करने की दिशा में युद्ध स्तर पर काम कर रही है। दिल्ली में ई-बसों की संख्या 4,500 से अधिक हो चुकी है और 2026 के अंत तक इसे 7,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।''
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दिल्ली देश में सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक बस बेड़ा रखने वाली शहर बन गई है और सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक इस संख्या को बढ़ाकर लगभग 14,000 बसों तक पहुंचाना है।
रेखा ने बताया कि नयी बसों में बड़ी संख्या देवी बसों की है, जो दूरस्थ और संकरी गलियों तक पहुंचकर आम नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करेंगी।
दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति को देश की सबसे प्रभावी और व्यापक नीतियों में से एक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले चार वर्षों के लिए 4,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसके तहत न केवल निजी वाहनों को प्रोत्साहन और सड़क कर में छूट दी जा रही है, बल्कि अब स्कूल बसों और वाणिज्यिक वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने की योजना तैयार है।
पर्यावरण के प्रति अपनी संवेदनशीलता दोहराते हुए रेखा ने कहा कि होलंबी कलां क्षेत्र में एक विशाल 'इलेक्ट्रिक वाहन कचरा निपटान संयंत्र' स्थापित किया जाएगा, ताकि भविष्य में ई-वाहनों की बैटरियों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार स्वच्छ, हरित और सतत परिवहन प्रणाली के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, क्योंकि ये प्रयास दिल्ली को एक सुरक्षित, तेज और प्रदूषण मुक्त भविष्य की ओर ले जाएंगे।
इस मौके पर दिल्ली के परिवहन मंत्री पकंज सिंह ने कहा, "आज दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक बसों के क्षेत्र में अग्रणी बन चुकी है और हम इस बेड़े को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि प्रदूषण में कमी लाई जा सके और यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान किया जा सके।"
भाषा
नोमान नोमान पारुल
पारुल
1704 1841 दिल्ली