सिद्धरमैया 'बेबस' हैं, 'मजबूरी' का सामना कर रहे: कांग्रेस विधायक राजन्ना
नेत्रपाल
- 17 Apr 2026, 07:50 PM
- Updated: 07:50 PM
बेंगलुरु, 17 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर सिद्धरमैया के विश्वासपात्रों को निशाना बनाए जाने के दावों के बीच वरिष्ठ विधायक के.एन. राजन्ना ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ''बेबस'' हैं और किसी ''मजबूरी'' का सामना कर रहे हैं क्योंकि वह अपने लोगों की रक्षा करने के लिए खड़े नहीं हो रहे हैं।
हाल ही में कुछ पार्टी नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद राजन्ना ने यह बात कही।
सिद्धरमैया के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री ने यह टिप्पणी कांग्रेस द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ नेताओं (जो मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं) के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बाद की।
पार्टी ने संबंधित नेताओं पर कार्रवाई नौ अप्रैल को दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ आंतरिक साजिश रचने के आरोप के बाद की।
राजन्ना को भी पिछले साल अगस्त में पार्टी आलाकमान के निर्देश पर मंत्रालय से बर्खास्त कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोप की कथित तौर पर आलोचना की थी।
यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस में सिद्धरमैया के समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है, राजन्ना ने कहा, ''पार्टी में कुछ स्वार्थी तत्व होंगे जो पार्टी के प्रति वफादार रहे और जनता के कल्याण के लिए पार्टी को आगे बढ़ाने की मंशा रखने वालों के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश करेंगे। इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता। हम अपने मुख्यमंत्री से यही उम्मीद करते हैं कि ऐसी स्थिति आने पर वह मजबूती से खड़े रहें, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पा रहे, और यह बहुत दुख की बात है।''
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ''...मुझे नहीं पता कि उनकी सोच क्या है। लेकिन हमें सिद्धरमैया की ऐसी 'बेबस' स्थिति की उम्मीद नहीं थी।''
यह पूछे जाने पर कि सिद्धरमैया को बेबस किसने बनाया, पूर्व मंत्री ने कहा, ''मैं नहीं बताऊंगा कि किसने, आप खुद समझ लीजिए।''
उन्होंने कहा, ''लोग कह रहे हैं कि सिद्धरमैया के करीबी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है... मुझे नहीं पता सिद्धरमैया किस मजबूरी में हैं। अगर वह बताएंगे तो हमें पता चल जाएगा, लेकिन वह बता नहीं रहे हैं। मुझे नहीं पता कि किस मजबूरी में वह ऐसी तटस्थता बरत रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बेबस हैं और इंसान तब बेबस हो जाता है जब उसकी आवाज दब जाती है।
कांग्रेस ने हाल ही में विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के. अब्दुल जब्बार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था और एक अन्य एमएलसी नसीर अहमद को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव के पद से हटा दिया था।
यह कार्रवाई मुस्लिम नेताओं के एक समूह द्वारा अपनी ही पार्टी के सदस्यों पर दावणगेरे दक्षिण में आधिकारिक उम्मीदवार को हराने की 'साजिश' रचने का आरोप लगाए जाने के बाद की गई।
जब्बार और नसीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई के बाद, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आवास मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान को भी अगले मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि ये तीनों दावणगेरे दक्षिण से उपचुनाव में किसी मुस्लिम को टिकट दिलाना चाहते थे। लेकिन पार्टी ने दिवंगत विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते समर्थ मल्लिकार्जुन को टिकट दे दिया, इसलिए उन्होंने कथित तौर पर चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया।
राजन्ना ने उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का नाम लिए बगैर उन पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए पूछा, ''क्या उस व्यक्ति (सद्गुरु जग्गी वासुदेव के संदर्भ में) के साथ (जिसने कहा था, 'राहुल गांधी कौन हैं? मैं नहीं जानता' मंच साझा करना अनुशासनहीनता नहीं है?''
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान का जिक्र करते हुए कि क्या प्रयागराज में गंगा में डुबकी लगाने से गरीबी खत्म हो सकती है, उन्होंने कहा, ''...लेकिन वह व्यक्ति (फिर से शिवकुमार का जिक्र करते हुए) वहां जाता है और कुंभ मेले में किए गए इंतजामों के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करता है। वह अंबानी परिवार की शादी में भी जाता है, जबकि राहुल गांधी ने निमंत्रण तक स्वीकार नहीं किया।''
भाषा संतोष नेत्रपाल
नेत्रपाल
1704 1950 बेंगलुरु