महिला आरक्षण संबंधी विधेयक गिरने के बाद भाजपा की महिला सांसदों का संसद के बाहर प्रदर्शन
नेत्रपाल
- 17 Apr 2026, 11:26 PM
- Updated: 11:26 PM
नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 2029 से आरक्षण लागू करने और लोकसभा सदस्यों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के निम्न सदन में गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला सांसदों ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया।
हाथों में तख्तियां लेकर और "भारत महिलाओं के इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा" के नारे लगाते हुए सांसदों ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक को जानबूझकर रोक दिया।
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि इस कदम ने राजनीतिक सशक्तीकरण की प्रतीक्षा कर रही करोड़ों महिलाओं का "अपमान" किया है।
उन्होंने कहा, "आज 65 करोड़ महिलाएं प्रतीक्षा कर रही थीं। हम पराजित नहीं हुए हैं, बल्कि संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा हार गया है। हम इस मानसिकता को स्वीकार नहीं करेंगे। विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) ने महिलाओं का अपमान किया है-इसके लिए राहुल गांधी और कांग्रेस जिम्मेदार हैं।"
केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने विपक्ष पर महिलाओं को आरक्षण देने के "ऐतिहासिक" कदम को रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे उनका "महिला-विरोधी" रुख उजागर हुआ है, जबकि सरकार ने सभी चिंताओं का समाधान किया था।
केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा सांसद अन्नपूर्णा देवी ने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन की मंशा "नारी शक्ति विधेयक" को पारित नहीं होने देने की थी।
उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट है कि वे महिलाओं को विधानसभाओं में प्रवेश नहीं करने देना चाहते। लेकिन भारत की महिलाएं अब इसे बर्दाश्त नहीं करेंगी और कांग्रेस तथा 'इंडिया' गठबंधन को करारा जवाब देंगी।"
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने इस घटनाक्रम को "शर्मनाक" और "बेहद पीड़ादायक" बताया तथा विपक्ष पर महिलाओं का मनोबल गिराने का आरोप लगाया।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनावों से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।
सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
भाषा खारी नेत्रपाल
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