पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान, हिंसा की छिटपुट घटनाएं
देवेंद्र
- 24 Apr 2026, 12:19 AM
- Updated: 12:19 AM
कोलकाता, 23 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण में 152 सीट पर मतदान हुआ और निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक 92.72 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस दौरान हिंसा, मतदाताओं को डराने-धमकाने और कम से उम्मीदवारों पर हमले की छिटपुट घटनाएं भी हुईं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा, "यह आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल में दर्ज अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है।"
आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक राज्य में इससे पहले सबसे अधिक मतदान 2011 के विधानसभा चुनावों के दौरान 84.72 प्रतिशत रहा था।
कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को हुए मतदान में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही, जिसमें महिला मतदाताओं का प्रतिशत 92.69 रहा, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 90.92 रहा। तीसरे लिंग के मतदाताओं का प्रतिशत 56.79 रहा।
भारी मतदान पर दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वी दलों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस ने अपने पक्ष में निर्णायक जनादेश मिलने की उम्मीद जताई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नदिया जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए मतदान को ''परिवर्तन के लिए भारी जनादेश'' बताया और दावा किया कि चुनाव संबंधी हिंसा पिछले पांच दशकों में सबसे कम रही। हालांकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उच्च मतदान प्रतिशत दर्शाता है कि ''लोगों में यह डर है कि अगर वे मतदान नहीं करेंगेह, तो वे अपना मताधिकार और नागरिकता खो सकते हैं।'' उन्होंने मतदाता भागीदारी को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)की प्रक्रिया के साथ जोड़ा।
पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव आठ चरणों में संपन्न हुए थे और कुल मतदान प्रतिशत 82.30 फीसदी रहा था।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में अलग-अलग चरणों में मतदान 79 से 86 प्रतिशत के बीच रहा था।
बीरभूम जिले के खारिसोल में अंतिम घंटों के दौरान तनाव काफी बढ़ गया, जब मतदाताओं ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में डाले गए वोट भाजपा के खाते में दर्ज हो रहे हैं। चुनाव अधिकारियों और नाराज मतदाताओं के बीच बहस छिड़ने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों का एक समूह मतदान केंद्र के बाहर इकट्ठा हो गया और प्रदर्शन करने लगा।
इससे पहले, दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु सरकार के साथ उस समय हाथापाई की गई जब वह गड़बड़ी की खबरों के बाद एक मतदान केंद्र की ओर जा रहे थे। वहीं, एक अन्य घटना में आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के रहमत नगर में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर पथराव किया गया जिससे उसकी पिछली खिड़कियों के शीशे टूट गए।
मुर्शिदाबाद के नौदा में आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) और तृणमूल के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए केंद्रीय बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा। लाभपुर, चंचल और मुरारई से हिंसा की अन्य घटनाएं सामने आईं, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों में कई लोग घायल हो गए। डोमकल में, मतदाताओं को बूथों तक पहुंचने से रोके जाने के आरोप लगे, जिसके कारण सुरक्षाकर्मियों की तैनाती आवश्यक हो गई।
अधिकारियों ने कहा कि मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन निर्वाचन आयोग को मतदान से जुड़ी करीब 500 शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि 'सीविजिल' ऐप के माध्यम से 375 अन्य शिकायतें दर्ज की गईं। तृणमूल कांग्रेस ने दोपहर तक 700 से अधिक शिकायतें दर्ज कराने का दावा किया, जिनमें से कई ईवीएम में कथित खराबी और केंद्रीय बलों के आचरण से संबंधित थीं।
मुर्शिदाबाद, बांकुड़ा और कूच बिहार में मतदान प्रतिशत लगभग 90 प्रतिशत या उससे अधिक रहा, जबकि मालदा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर में भी लगभग यही स्तर रहा। कलिम्पोंग में यह अपेक्षाकृत कम लगभग 81 प्रतिशत रहा।
हिंसा की घटनाओं के बावजूद, राज्य में पिछले चुनावों की तुलना में मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा।
राज्य में शाम पांच बजे तक करीब 90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अधिकारियों के अनुसार अंतिम मतदान प्रतिशत और बढ़ सकता है, जो संभवतः 95 प्रतिशत के करीब पहुंच सकता है।
पहले दो घंटे में 3.60 करोड़ मतदाताओं में से 18.76 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और धीरे-धीरे मतदान में तेजी आई। पूर्वाह्न 11 बजे तक 41.11 प्रतिशत और अपराह्न एक बजे तक 62.18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। तीन बजे तक 78 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे।
भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में कतारों में खड़े नजर आए और जैसे-जैसे समय बीतता गया, मतदान की गति तेज होती गई।
एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में नाम काटे जाने को लेकर विवाद के बीच राज्य के 16 जिलों में मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 167 महिलाओं सहित 1,478 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा।
एसआईआर के तहत राज्य भर में मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे।
वर्ष 2021 में, भाजपा ने इन 152 सीटों में से 59 सीटें जीती थीं, जबकि तृणमूल को 93 सीटें मिली थीं। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को होगी।
इस बीच, निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद के नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें मतदान समाप्त होने के बाद निगरानी कैमरों और वीडियो डेटा को संभालने के लिए सख्त प्रोटोकॉल निर्धारित किए गए हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए दिशानिर्देशों के तहत, मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतदान केंद्रों के कैमरों में इस्तेमाल किए गए एसडी कार्ड नहीं निकाले जा सकते हैं, और संबंधित अधिकारियों को ही कैमरे निकालने की अनुमति होगी, जिसके बाद कैमरे सेक्टर अधिकारी की निगरानी में ही रहेंगे।
उन्होंने कहा, "एसडी कार्ड केवल निर्धारित डेटा संग्रह और प्राप्ति केंद्र पर सहायक निर्वाचन अधिकारी की उपस्थिति में ही निकाले जा सकते हैं।"
भाषा धीरज देवेंद्र
देवेंद्र
2404 0019 कोलकाता