जीती गई दो विधानसभा सीट में से एक 10 दिन में खाली कर दूंगा: शुभेंदु अधिकारी
नरेश
- 06 May 2026, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
कोलकाता, छह मई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो सीट भवानीपुर और नंदीग्राम पर जीत दर्ज करने वाले भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि वह 10 दिनों के भीतर इनमें से एक सीट से इस्तीफा दे देंगे।
अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पराजित किया जबकि नंदीग्राम सीट पर लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।
अधिकारी ने नंदीग्राम में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान भावना और पार्टी अनुशासन के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाए रखा, जो पूर्वी मेदिनीपुर जिले के इस निर्वाचन क्षेत्र के प्रति उनके भावनात्मक लगाव और कोलकाता के भवानीपुर में उनकी जीत के राजनीतिक महत्व दोनों को दर्शाता है। वह अक्सर नंदीग्राम को अपना राजनीतिक 'भद्रासन' (गढ़) करार देते हैं।
अधिकारी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, ''मैं 10 दिनों के भीतर एक सीट खाली कर दूंगा। पार्टी तय करेगी कि मैं कौन सी सीट बरकरार रखूंगा। मेरी जो भी निजी राय होगी, मैं उसे नेतृत्व को बता दूंगा। मैं भवानीपुर और नंदीग्राम के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलूंगा।''
अधिकारी का यह बयान उन अटकलों के बीच आया है कि क्या वह नंदीग्राम सीट को बरकरार रख पाएंगे, जो 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का केंद्र था, जिसने उन्हें एक जन नेता के रूप में स्थापित किया था, या भवानीपुर सीट का प्रतिनिधित्व करेंगे जहां उन्होंने बनर्जी को करारी हार दी है, जिसे लंबे समय से उनका सबसे सुरक्षित राजनीतिक गढ़ माना जाता था।
अधिकारी के लिए इन दोनों सीट पर जीत के अलग-अलग राजनीतिक मायने हैं।
नंदीग्राम में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ चलाए गए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से अंततः 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने का रास्ता साफ हुआ। उस समय, अधिकारी ममता बनर्जी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों और जमीनी स्तर पर प्रमुख क्षत्रपों में से एक थे, जो नंदीग्राम और आसपास के क्षेत्रों में लामबंदी का काम संभाल रहे थे, जबकि बनर्जी राज्य स्तर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रही थीं।
इस आंदोलन ने न केवल वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को समाप्त किया बल्कि अधिकारी को राज्य में एक इलाकाई क्षत्रप से तटीय बंगाल के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों में से एक में बदल दिया।
अधिकारी सबसे पहले तामलुक क्षेत्र से सांसद चुने गए, जिसमें नंदीग्राम विधानसभा सीट भी शामिल है। वह वर्ष 2021 में भाजपा में शामिल हुए और कुछ महीने बाद ही हुए विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से बनर्जी को एक कड़े मुकाबले में हराया। इसने बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को नाटकीय रूप से बदल दिया था।
इन वर्षों में, अधिकारी ने नंदीग्राम को अपने करियर का भावनात्मक और राजनीतिक आधार माना। वह भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियों और प्रमुख धार्मिक अवसरों पर नियमित रूप से इस निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करते रहे हैं।
लेकिन भवानीपुर ने पूर्व तृणमूल नेता के लिए एक नये राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की है। उन्होंने सोमवार को दक्षिण कोलकाता के इस निर्वाचन क्षेत्र में बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों से हराकर तृणमूल सुप्रीमो के सियासी रसूख पर चोट पहुंचाई और भाजपा को राज्य में अपनी व्यापक चुनावी जीत के साथ-साथ एक बड़ी मनोवैज्ञानिक सफलता भी दिलाई।
भाजपा के लिए, भवानीपुर में अधिकारी की जीत चुनावी गणित से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। पूर्वी मेदिनीपुर के एक नेता द्वारा बनर्जी को उनके ही राजनीतिक गढ़ में हराना, बंगाल में भाजपा की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण छवियों में से एक बन गया।
दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने के इस प्रयास के तहत अधिकारी ने नंदीग्राम में अपने संबोधन के दौरान भवानीपुर के मतदाताओं को बार-बार धन्यवाद दिया और दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में समर्थकों को आश्वासन दिया कि वह औपचारिक रूप से जिस भी सीट पर जीत हासिल करें, अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा, ''चाहे औपचारिक रूप से हो या अनौपचारिक रूप से, मैं दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह करूंगा।''
अधिकारी ने बुधवार को रेयापाड़ा, हरिपुर और नंदीग्राम के अन्य हिस्सों में सभाओं को संबोधित किया। इस दौरान समर्थकों ने बार-बार नारे लगाकर उनसे निर्वाचन क्षेत्र न छोड़ने की अपील की।
बातचीत के दौरान कुछ समर्थकों को उनसे यह कहते हुए सुना गया, ''हमें छोड़कर मत जाइये।''
भाजपा नेता ने हालांकि इस अवसर का उपयोग संगठनात्मक अनुशासन पर जोर देने के लिए किया।
अधिकारी ने कहा, ''मैं बचपन से ही अनुशासित रहा हूं। हर फैसला अकेले नहीं लिया जा सकता। मैं आपका कर्ज चुकाऊंगा। कृपया निश्चिंत रहें।'' इसी के साथ संकेत दिया कि अंतिम फैसला पार्टी आला कमान करेगा।
बंगाल में हुए राजनीतिक परिवर्तन का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा, ''मैं 2011 के 'परिवर्तन' का हिस्सा था, और अब मैं वास्तविक परिवर्तन का हिस्सा हूं।'' उन्होंने 2011 में तृणमूल के सत्ता में आने और 2026 में भाजपा के उदय के बीच अंतर स्पष्ट किया।
अधिकारी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए अपील की कि वे तत्काल विजय जुलूस न निकालें और इसके बजाय नौ मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह तक संयम बनाए रखें।
भाजपा की बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने घोषणा की है कि राज्य में पार्टी की पहली सरकार का शपथ ग्रहण समारोह नौ मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा।
अधिकारी ने तृणमूल शासनकाल के दौरान राजनीतिक हिंसा में कथित तौर पर मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं को भी याद करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं पर हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी ने नंदीग्राम के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की और राजनीतिक हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा, ''हम इस तरह से काम करेंगे कि बंगाल में भाजपा की सरकार सौ साल तक बनी रहे।''
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले चुनाव में राज्य में भाजपा का मत प्रतिशत मौजूदा 46 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगा।
भाजपा नेता ने नंदीग्राम के निवासियों को बेहतर पेयजल आपूर्ति और बेहतर अस्पतालों का आश्वासन भी दिया।
भाषा धीरज नरेश
नरेश
0605 2034 कोलकाता