नीट प्रश्नपत्र लीक : डीयू के कुलपति ने प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों से 'अराजकता से बचने' की अपील की
प्रशांत
- 13 May 2026, 09:21 PM
- Updated: 09:21 PM
(अहेली दास)
नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में नीट परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे विभिन्न छात्र संगठनों से ''अराजकता से बचने'' का आग्रह किया।
सिंह ने 'पीटीआई-भाषा' के साथ साक्षात्कार में विरोध-प्रदर्शनों के संबंध में छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों से छात्रों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करने का आग्रह किया।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद भी अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें और व्यवस्था में अपना विश्वास बनाए रखें।
सिंह ने कहा, ''अगर अनावश्यक राजनीतिक अराजकता और अशांति फैलती है, तो इसका असर हमारे बच्चों पर पड़ेगा। ये हमारे बच्चे हैं और इनका भविष्य ही हमारे देश का भविष्य है।''
नीट को दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक बताते हुए सिंह ने कहा कि ऐसी परीक्षाओं से जुड़ी आकांक्षाएं कोई नई बात नहीं हैं और सीमित सीटों के लिए भारी प्रतिस्पर्धा इसका कारण है।
उन्होंने कहा, ''भारत 140 करोड़ लोगों का देश है। छात्रों की संख्या की तुलना में सीटों की संख्या बहुत कम है। कुछ ही सीटों के लिए लगभग 23 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होने थे।''
डीयू के कुलपति ने कहा, ''जब प्रतिस्पर्धा अधिक होती है, तो कुछ लोग सोचते हैं कि वे इस स्थिति से पैसा कमा सकते हैं। जिस तरह हम शराब माफिया या मादक पदार्थ माफिया के बारे में सुनते हैं, यह भी संगठित अपराध है और इससे निपटना महत्वपूर्ण है।''
उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी और सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों के कारण परीक्षा प्रणाली को नयी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सिंह ने कहा, ''प्रौद्योगिकी हमें अवसर देती है, लेकिन साथ ही साथ चुनौतियां भी लाती है। तंत्र में सेंध लगाने के लिए छिपे हुए कैमरों और कई अन्य चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन अंततः सुधार जरूर होगा।''
नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में बढ़ती चिंता के सवाल पर कुलपति ने इस घटनाक्रम को ''पीड़ादायक'' बताया और कहा कि इस स्थिति से बचा जा सकता था। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने परीक्षा रद्द करके ''सही समय पर सही कदम'' उठाया है।
भाषा
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