भारत ने वैश्विक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए व्यावहारिक रास्ते खोजने का आह्वान किया
वैभव
- 14 May 2026, 02:01 PM
- Updated: 02:01 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को ब्रिक्स देशों से भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक व्यवधानों के परिणामों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए ''व्यावहारिक तरीके'' खोजने का आग्रह किया। साथ ही वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यह टिप्पणी यहां आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में की, जिसमें ईरान, रूस, ब्राजील और समूह के कई अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया।
यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया संकट विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति में उत्पन्न भारी व्यवधानों के कारण वैश्विक आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
दो दिवसीय सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में जयशंकर ने कहा, ''हम ऐसे समय में मुलाकात कर रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में काफी उथल-पुथल मची हुई है।''
उन्होंने कहा, ''जारी संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितताएं और व्यापार, प्रौद्योगिकी तथा जलवायु से जुड़ी चुनौतियां वैश्विक परिदृश्य को आकार दे रही हैं।''
ब्रिक्स दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करता है।
समूह की अध्यक्षता कर रहे भारत ने सितंबर में होने वाले ब्रिक्स वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के सम्मेलन की मेजबानी की।
जयशंकर ने कहा कि विशेष रूप से उभरते बाजारों और विकासशील देशों में यह अपेक्षा बढ़ी है कि ब्रिक्स वर्तमान चुनौतियों से निपटने में रचनात्मक और स्थिरता प्रदान करने वाली भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा, ''इस पृष्ठभूमि में आज की हमारी चर्चा वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार करने तथा सहयोग को मजबूत करने के व्यावहारिक उपाय तलाशने का अवसर है।''
विदेश मंत्री ने कहा कि विकास से जुड़े मुद्दे अब भी अहम हैं। उन्होंने कहा कि कई देश ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों के साथ-साथ वित्तीय संसाधनों तक पहुंच की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''ब्रिक्स इन देशों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया में मदद कर सकता है। आर्थिक मजबूती भी बेहद महत्वपूर्ण है। भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला और विविधतापूर्ण बाजार इसके आवश्यक घटक हैं। हमें दोनों पर ध्यान देना होगा।''
जयशंकर ने कहा कि शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के लिए ''अहम'' बनी हुई है।
उन्होंने कहा, ''हाल के संघर्ष संवाद और कूटनीति के महत्व को और रेखांकित करते हैं। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करने में भी सभी की गहरी साझा रुचि है।''
ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में इसका विस्तार कर इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया। वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का सदस्य बना।
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक गत वर्ष सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के इतर आयोजित हुई थी।
भाषा गोला वैभव
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