आंध्र प्रदेश में 20 लाख रोजगार सृजन में एमएसएमई की अहम भूमिका: मंत्री नारा लोकेश
निहारिका
- 14 May 2026, 01:25 PM
- Updated: 01:25 PM
अमरावती, 14 मई (भाषा) आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि राज्य के 20 लाख रोजगार सृजन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है।
लोकेश ने 'एसएमई आईपीओ – वृद्धि के लिए वैकल्पिक वित्त विकल्प' विषय पर आयोजित जागरूकता संगोष्ठी में यह बात कही। इसका आयोजन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई), आंध्र प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम विकास निगम और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई( ने संयुक्त रूप से किया।
बुधवार देर रात जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार मंत्री ने कहा, '' एमएसएमई 20 लाख नौकरियों के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक हैं और सरकार 'मेड इन आंध्र – मेड फॉर इंडिया – मेड फॉर द वर्ल्ड' के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।''
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में पिछले 23 महीनों में आंध्र प्रदेश एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है।
लोकेश ने कहा कि अब तक करीब 800 परियोजनाओं के लिए 23 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते किए गए हैं। इनसे करीब 24 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
गूगल, आर्सेलर मित्तल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, कॉग्निजेंट और रॉयल एनफील्ड जैसी कंपनियां राज्य में परियोजनाएं स्थापित कर रही हैं, जबकि उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) विनिर्माण परियोजना को भी पुट्टपर्थी में स्थापित करने का प्रस्ताव है।
विशाखापत्तनम में गूगल की डाटा सेंटर परियोजना के बाद श्री सिटी में कैरियर के निवेश प्रस्ताव का जिक्र करते हुए लोकेश ने कहा कि हर बड़ा निवेश रोजगार के अवसर उत्पन्न करता है।
उन्होंने कहा, '' जब एक बड़ा निवेश आता है तो उसके आसपास कई सहायक उद्योग एवं रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।''
मंत्री ने साथ ही एमएसएमई विभाग को निर्देश दिया कि अगले तीन महीनों में आंध्र प्रदेश की कम से कम 100 कंपनियों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया में सूचीबद्ध कराने की दिशा में काम किया जाए।
लोकेश ने बताया कि देशभर में 723 कंपनियों ने एनएसई में सूचीबद्ध होकर 22,415 करोड़ रुपये जुटाए हैं लेकिन आंध्र प्रदेश की अब तक केवल तीन कंपनियां ही सूचीबद्ध हुई हैं।
उन्होंने उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी व्यवसाय बनाने के लिए प्रोत्साहित किया और उद्योगों एवं एमएसएमई को सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
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