नीट में कंप्यूटर आधारित परीक्षा से 'कमजोरियां' दूर हो सकेंगी : पूर्व यूजीसी अध्यक्ष कुमार
माधव
- 15 May 2026, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने केंद्र सरकार द्वारा आगामी वर्षों में नीट को कंप्यूटर आधारित प्रारूप (सीबीटी) में तब्दील करने के फैसले का शुक्रवार को समर्थन करते हुए कहा कि लाखों अभ्यार्थियों द्वारा दी जाने वाली इस परीक्षा में मौजूदा समय में मुद्रित प्रश्नपत्रों को केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में 'कमजोर कड़िया' हैं, जिससे कदाचार की आशंका बढ़ जाती है।
कुमार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की बढ़ती आलोचना और विभिन्न धड़ों द्वारा इसे भंग करने की मांग के बीच कहा कि एजेंसी की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में आने वाले वर्षों में अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है।
एनटीए ने घोषणा की है कि चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दोबारा राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 21 जून को आयोजित की जाएगी।
प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आने के बाद तीन मई को आयोजित नीट-यूजी2026 रद्द किये जाने और 21 जून को इसे दोबारा कराने पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमार ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद अभ्यार्थी स्वाभाविक रूप से तनाव में हैं और निराश हैं।
भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), कोलकाता के शासी मंडल के सदस्य कुमार ने 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, ''जब भी कोई प्रवेश परीक्षा रद्द होती है, तो स्वाभाविक है कि हमारे युवा अभ्यर्थी तनावग्रस्त और निराश महसूस करेंगे। इन कठिन समय में, हम सभी शिक्षकों और अभिभावकों को अपने छात्रों के साथ खड़े रहना चाहिए और उनका समर्थन करना चाहिए।''
उन्होंने कहा कि एनटीए ने छात्रों के मन में किसी भी तरह की अनिश्चितता को दूर करने के लिए पुनर्परीक्षा की तारीख की घोषणा शीघ्रता से की।
कुमार ने बताया कि 2017 में अपनी स्थापना के बाद से, एनटीए ने जेईई और सीयूईटी सहित कई बड़े पैमाने की परीक्षाएं आयोजित की हैं, जिनमें से अधिकांश सीबीटी मोड में आयोजित की गई हैं।
उन्होंने कहा, ''ये परीक्षाएं आमतौर पर बहुत सुरक्षित होती हैं, जबकि नीट एक दिन की परीक्षा होती है जिसमें देश और विदेश में लगभग 22 लाख छात्र और 54,000 केंद्र शामिल होते हैं। इसमें प्रश्न पत्रों का मुद्रण, परिवहन, भंडारण और केंद्रों पर वितरण की आवश्यकता होती है। पूरी आपूर्ति शृंखला में कुछ कमियां हो सकती हैं।''
कुमार ने कहा, ''बेईमान तत्व इन कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं और नीट के मामले में यही हुआ है।'' उन्होंने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) की जांच जारी है और दोषियों को कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
सरकार द्वारा नीट को क्रमबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में तब्दील करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कुमार ने कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर समस्या होने पर राष्ट्रव्यापी व्यवधान को रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, ''सीबीटी मोड में परीक्षा आयोजित करने का एक फायदा यह है कि यदि किसी विशेष केंद्र पर कोई स्थानीय समस्या होती है, तो वह वहीं तक सीमित रहती है, और आप राष्ट्रव्यापी परीक्षा रद्द करने के बजाय केवल छात्रों के उस समूह के लिए पुनः परीक्षा आयोजित कर सकते हैं।''
कुमार ने विभिन्न सत्रों में कठिनाई के स्तर में भिन्नता को लेकर जताई गई चिंताओं पर के बारे में कहा कि सीयूईटी (संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा) में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही मानकीकरण प्रक्रिया ''एक अत्यंत वैज्ञानिक और सांख्यिकीय प्रक्रिया'' है और इसे इसी तरह नीट के लिए भी अपनाया जा सकता है।
उन्होंने छात्रों के लिए घोषित उपायों का भी स्वागत किया, जिनमें परीक्षा शुल्क की वापसी और परीक्षा के दौरान 15 मिनट अतिरिक्त समय देना शामिल है।
कुमार ने कहा कि आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या में काफी वृद्धि होने की संभावना है, जिससे एनटीए जैसे संस्थान आवश्यक हो जाएंगे।
उन्होंने कहा, ''हमें निश्चित रूप से एनटीए जैसे संगठन की आवश्यकता है, जो सुरक्षित और पेशेवर तरीके से परीक्षाएं आयोजित करता है ताकि महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से हो सके।''
जगदीश कुमार ने कहा, ''...ऐसे कठिन समय में आलोचना करना स्वाभाविक है, लेकिन भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हम सभी को मिलकर कुछ अपराधियों द्वारा परीक्षाओं में धांधली करने की कोशिश की जा रही इस सामाजिक बुराई से लड़ना होगा और फिर अपनी राष्ट्रीय प्रवेश प्रणाली को मजबूत करना होगा।''
उन्होंने 2024 के नीट विवाद के बाद शुरू किए गए सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति की कई सिफारिशें पहले ही लागू की जा चुकी हैं।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने कहा, ''यह एक सतत सुधार प्रक्रिया है। साल दर साल, प्रणाली में सुधार होता रहेगा।'' उन्होंने पुन: परीक्षा देने वाले अभ्यार्थियों से ''सकारात्मक रहने, अच्छी तैयारी करने और परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने'' की अपील की।
इससे पहले दिन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की थी कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) की पुन: परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अनियमितताओं के आरोपों के मद्देनजर सुधारों के तहत अगले वर्ष से मेडिकल प्रवेश परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी।
प्रधान ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र और उनका भविष्य सरकार की ''सर्वोच्च प्राथमिकता'' हैं। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी परीक्षा के संचालन में पाई गई अनियमितताओं के खिलाफ 'बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने' की नीति अपनाई जाएगी और सख्त कार्रवाई की जा रही है।
भाषा धीरज माधव
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