एशियाई खेलों के आधार पर ओलंपिक क्वालीफायर के लिए मुक्केबाजों का चयन किया जा सकता है: नीवा
नमिता
- 16 May 2026, 07:45 PM
- Updated: 07:45 PM
... अपराजिता उपाध्याय ...
पटियाला, 16 मई (भाषा) भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम के मुख्य कोच सैंटियागो नीवा ने लगातार ट्रायल कराने की मौजूदा व्यवस्था के बजाय प्रदर्शन आधारित चयन प्रणाली का समर्थन करते हुए कहा कि एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय मुक्केबाजों को भविष्य में ओलंपिक क्वालीफायर के लिए सीधे प्रवेश का मौका मिल सकता है।
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने इस वर्ष राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों के लिए खिलाड़ियों के चयन में कई मानकों पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की कोशिश की थी। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) को मिली शिकायतों के बाद महासंघ को पारंपरिक ट्रायल प्रणाली पर लौटना पड़ा।
तीन दिन तक चले चयन ट्रायल के बाद शुक्रवार को दोनों बहु-खेल आयोजनों के लिए भारतीय टीमों का चयन किया गया। वहीं, कुछ मुक्केबाजों ने पिछले महीने आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीतकर पहले ही अपनी जगह पक्की कर ली थी।
नीवा ने 'पीटीआई' से कहा, "अब हमारे पास अंतरराष्ट्रीय परिणामों के आधार पर चयन करने का अवसर है। चयन ट्रायल में जितना कम समय व्यतीत किया जाए, उतना ही बेहतर है।"
अर्जेंटीना में जन्मे स्वीडन के इस कोच ने कहा कि एशियाई चैंपियनशिप में अपनाया गया मॉडल भविष्य के लिए उदाहरण बन सकता है, जहां फाइनल में पहुंचने वाले मुक्केबाजों को सीधे राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों के लिए चुना गया था।
उन्होंने कहा, "जैसे हमने एशियाई चैंपियनशिप में किया था, फाइनल में पहुंचने वाले खिलाड़ी स्वतः ही क्वालीफाई कर गए (राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के लिए)। हम एशियाई खेलों और शुरुआती ओलंपिक क्वालीफायर से पहले होने वाली अन्य प्रतियोगिताओं के लिए भी कुछ ऐसा ही कर सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर कोई स्वर्ण या रजत पदक जीतता है, तो वह सीधे विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर सकता है, जो पहला ओलंपिक क्वालीफायर है।"
नीवा ने कहा, "इस तरह हमें तैयारी के लिए लगभग पांच महीने का समय मिल जाएगा, जिसमें हम बार-बार चयन के कारणों से बंधे रहने की जगह यह चुन सकते हैं कि किन प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेना है।"
भारतीय मुक्केबाजी के लिए अगले दो वर्ष बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए चार क्वालीफाइंग प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इनमें 2027 में कजाखस्तान में होने वाली विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप और एशियाई क्वालीफायर शामिल हैं, जबकि 2028 में दो विश्व क्वालीफायर खेले जाएंगे।
नीवा ने कहा कि हर बड़े टूर्नामेंट से पहले चयन ट्रायल कराने से मुक्केबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा, "हमें भविष्य में भी कुछ ऐसा ही करने पर विचार करना चाहिए। कल्पना कीजिए कि अगर चार ओलंपिक क्वालीफायर हों और आपको हर एक के बीच में वापस आकर एक और चयन ट्रायल देना पड़े। इस तरह आप अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए कभी भी ठीक से तैयारी नहीं कर पाएंगे।"
नीवा 2017 से 2022 तक भारतीय मुक्केबाजी के हाई परफॉर्मेंस निदेशक रह चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह केवल ट्रायल आधारित चयन प्रणाली के समर्थन में नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से टीम चुनने के कई तरीके हैं। हमें सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज चाहिए और यह सुनिश्चित करना होगा कि हम सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों का ही चयन करें। 2017 में जब मैं आया, तो हमने सबसे पहले चयन परीक्षण प्रक्रिया में बदलाव किया था।"
उन्होंने कहा, "हर प्रतियोगिता के लिए चयन ट्रायल करना मुझे अच्छा तरीका नहीं लगता। यह एक पुराना तरीका है। कभी-कभी यह उपयोगी हो सकता है, लेकिन टीम चुनने के एकमात्र तरीके के रूप में यह काफी नहीं है।"
बीएफआई और साइ के बीच प्रशासनिक खींचतान के कारण राष्ट्रीय शिविर में देरी हुई और इसे कुछ समय के लिए स्थगित भी कर दिया गया था।
इस विवाद पर नीवा ने माना कि हालात को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।
उन्होंने बताया कि उन्होंने और पुरुष टीम के मुख्य कोच सीए कुटप्पा ने दिल्ली जाकर साइ अधिकारियों से मुलाकात की थी और समय की कमी को देखते हुए पारंपरिक ट्रायल प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया था।
नीवा ने कहा कि अब बीएफआई और साइ को मिलकर ऐसी निष्पक्ष चयन व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे खिलाड़ी और अधिकारी दोनों संतुष्ट हों।
भाषा
आनन्द नमिता
नमिता
1605 1945 पटियाला