ईओडब्ल्यू ने फर्जी जीएसटी बिल बनाने के गिरोह का भंडाफोड़ किया, छह आरोपी गिरफ्तार
माधव
- 16 May 2026, 08:56 PM
- Updated: 08:56 PM
नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मुखौटा कंपनियों और फर्जी बिल बनाने के नेटवर्क के माध्यम से संचालित एक कथित जीएसटी धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है और 128 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में शामिल होने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
ईओडब्ल्यू ने एक बयान में कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी कंपनियों का संचालन किया, फर्जी जीएसटी चालान तैयार किए और वस्तुओं या सेवाओं की वास्तविक आपूर्ति के बिना गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाया।
ईओडब्ल्यू की टीम ने 15 मई को दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न स्थानों पर कई छापे मारे और राज कुमार दीक्षित, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को गिरफ्तार किया।
ईओडब्ल्यू थाने में 24 मार्च को एक फर्जी कंपनी, एम/एस आरके एंटरप्राइजेज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत जीएसटी धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था।
बयान में यह कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जीएसटी विभाग में रोजगार दिलाने के बहाने उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक विवरणों का दुरुपयोग किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि पीड़ितों की जानकारी के बिना सितंबर 2025 में कंपनी का गठन किया गया था और बाद में इसका इस्तेमाल 128 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए किया गया था।
बयान में कहा गया है, "फर्जी इकाई के जरिए गलत तरीके से लगभग 10 करोड़ रुपये के आईटीसी का लाभ उठाया गया।"
तकनीकी निगरानी, जीएसटी रिकॉर्ड के विश्लेषण, बैंकिंग लेनदेन, ईमेल आईडी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से की गई जांच से पता चला कि दीक्षित और दिलीप कुमार इस गिरोह के मुख्य साजिशकर्ता थे और दोनों अभी भी फरार हैं।
पुलिस ने बताया कि दीक्षित अपने भाइयों और सहयोगियों के साथ मिलकर दरियागंज से बड़े पैमाने पर फर्जी बिल बनाने वाला गिरोह चलाता था और जाली व धोखाधड़ी से प्राप्त दस्तावेजों का उपयोग करके लगभग 250 मुखौटा कंपनियां बनाने की साजिश रचता था।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी बिलिंग, फर्जी जीएसटी लेनदेन और धोखाधड़ी वाले आईटीसी दावों के लिए इन कंपनियों का इस्तेमाल किया, जबकि कई बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और बिचौलियों के माध्यम से वित्तीय लेन-देन को छिपाया।
उन्होंने बताया कि अमर कुमार और विभाष कुमार मित्रा ने मुखौटा कंपनियों के गठन और फर्जी जीएसटी गतिविधियों में सहयोग किया।
नितिन वर्मा पर आरोप है कि उसने लेखाकारों की मदद से कई फर्जी कंपनियों का गठन और संचालन किया, जबकि मोहम्मद वसीम और आबिद फर्जी लेनदेन और फर्जी जीएसटी गतिविधियों के माध्यम से उत्पन्न आय को स्थानांतरित करने के लिए बैंक खाते और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी प्रदान करने में शामिल थे।
पुलिस ने बताया कि अब तक धन के लेन-देन और फर्जी जीएसटी प्रविष्टियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लगभग 50 मुखौटा कंपनियों और संस्थाओं की पहचान की गई है।
पुलिस ने अपनी तलाशी में 51.12 लाख रुपये नकद, 15 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, कई सिम कार्ड, नकली स्टाम्प, जाली दस्तावेज, भौतिक और डिजिटल रूप में बड़ी मात्रा में नकली चालान और आरोपियों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल की गई दो कारें बरामद कीं।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लाभार्थियों और संस्थाओं की पहचान करने के लिए जांच जारी है।
भाषा शुभम माधव
माधव
1605 2056 दिल्ली