केएसआरटीसी कर्मचारियों को हड़ताल से दूर रहने का निर्देश, 'नो वर्क-नो पे' की चेतावनी
अविनाश
- 18 May 2026, 04:55 PM
- Updated: 04:55 PM
बेंगलुरु, 18 मई (भाषा) कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक अकरम पाशा ने सोमवार को राज्य परिवहन निगमों के कर्मचारियों को 20 मई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल नहीं होने का निर्देश देते हुए अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ ''नो वर्क-नो पे'' तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी।
कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वेतन संशोधन और अन्य मांगों को पूरा नहीं किए जाने के कारण वे ऐसा करने को मजबूर हैं।
केएसआरटीसी के प्रबंध निदेशक द्वारा वरिष्ठ और मंडलीय अधिकारियों को जारी एक परिपत्र में कहा गया है कि श्रमिक संगठनों की संयुक्त कार्रवाई समिति द्वारा आहूत प्रस्तावित हड़ताल आवश्यक सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत स्वीकार्य नहीं है।
परिपत्र में कहा गया है कि कर्नाटक सरकार ने राज्य सड़क परिवहन निगमों की सेवाओं को कर्नाटक आवश्यक सेवा अधिनियम (केईएसएमए), 2013 के दायरे में रखा है।
इसमें कहा गया है कि अधिनियम के तहत निगमों के कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने की अनुमति नहीं है।
परिपत्र में कहा गया है कि राज्य के सभी चार सड़क परिवहन निगमों को सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं घोषित किया गया है और हड़ताल नोटिस से संबंधित विवाद वर्तमान में राज्य श्रम आयुक्त के समक्ष सुलह प्रक्रिया में लंबित है।
इसमें औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सुलह कार्यवाही लंबित रहने के दौरान सार्वजनिक उपयोगिता सेवा के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते।
अकरम पाशा ने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे 20 मई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल में ''किसी भी परिस्थिति में'' शामिल न हों और नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित होकर राज्य की जनता के विश्वास को बनाए रखें।
परिपत्र में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हड़ताल की अवधि में निर्धारित सेवाएं बाधित न हों, इसके लिए एहतियाती उपाय किए जाएं। इसके साथ ही 20 मई से अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी प्रकार की छुट्टी मंजूर नहीं करने का आदेश दिया गया है।
आदेश में कहा गया है कि हड़ताल अवधि के दौरान अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर ''नो वर्क-नो पे''(काम नहीं, तो वेतन नहीं) सिद्धांत के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वेतन कटौती और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए दिनवार, इकाईवार और श्रेणीवार अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
परिपत्र में उच्च न्यायालय की खंडपीठ के वर्ष 2004 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि ऐसी परिस्थितियों में बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासन वेतन कटौती और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है।
भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश
अविनाश
1805 1655 बेंगलुरु