न्यायालय ने प्रधानमंत्री, मंत्रियों का करीबी सहयोगी होने का दावा कर पैसे ऐंठने के आरोपी को जमानत दी
नरेश
- 18 May 2026, 05:02 PM
- Updated: 05:02 PM
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों का कथित तौर पर करीबी सहयोगी होने का दावा कर लोगों के काम करवाने के बदले पैसे ऐंठने के आरोपी एक व्यक्ति को धन शोधन के मामले में सोमवार को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 5 फरवरी के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें मोहम्मद काशिफ को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। काशिफ लगभग तीन वर्षों से न्यायिक हिरासत में है।
पीठ ने आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी कि वह उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के नामों का इस्तेमाल नहीं करेगा।
न्यायालय ने आरोपी को मामले की सुनवाई में सहयोग करने का निर्देश दिया और कहा कि ऐसा नहीं करने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को उसकी जमानत रद्द करने का अनुरोध करने की छूट होगी।
ईडी ने 19 अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर पुलिस थाने में दर्ज जालसाजी और धोखाधड़ी के एक मामले के आधार पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था।
यह आरोप है कि आरोपी खुद को प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी सहयोगी बता कर सरकारी विभागों से काम करवाने के बहाने लोगों से पैसे ऐंठता था।
राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित निगरानी से मिली सूचनाओं के आधार पर पिछले दो वर्षों से काशिफ की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
एजेंसी का आरोप है कि काशिफ ने वित्तीय लाभ हासिल करने के लिए लोगों को प्रभावित करने के मकसद से अपने फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ अनधिकृत रूप से संपादित तस्वीरें पोस्ट कीं।
जांच एजेंसी ने बताया कि छानबीन में यह भी सामने आया कि मंत्रियों का करीबी होने का दावा करके लोगों को प्रभावित करने के जरिए उसने राजस्थान सरकार और अन्य विभागों से कथित तौर पर निविदाएं हासिल कीं।
नोएडा पुलिस ने काशिफ को एक मर्सिडीज कार में तीन मोबाइल फोन के साथ पकड़ा था और उसके सोशल मीडिया अकाउंट की जांच से पता चला कि उसने प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ तस्वीरें पोस्ट की थीं।
एजेंसी को पता चला कि उसने 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के लिए अपने नाम से एक निमंत्रण पत्र और 20 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री के साथ दोपहर के भोजन के लिए अपने नाम से एक और निमंत्रण पत्र तथा ऐसे ही अन्य जाली दस्तावेज भी पोस्ट किए थे।
ईडी ने काशिफ से जुड़े परिसरों से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि कथित तौर पर बरामद होने का संज्ञान लिया और यह दलील दी कि यह रकम अपराध से अर्जित आय का हिस्सा है।
काशिफ ने उच्च न्यायालय में दलील दी थी कि उसे मूल अपराध में पहले ही जमानत मिल चुकी है और वह 25 मई 2023 से हिरासत में है तथा मुकदमे की सुनवाई में देरी हुई है।
भाषा सुभाष नरेश
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