बच्चों को निकट दृष्टि दोष से बचाने के लिए संतुलित जीवन शैली प्रदान करें अभिभावक: एम्स डॉक्टर
नरेश
- 18 May 2026, 07:26 PM
- Updated: 07:26 PM
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बच्चों की पास की नज़र कमजोर होने की समस्या पर सोमवार को चिंता जताते हुए अभिभाववकों से बालकों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखने और उन्हें संतुलित जीवन शैली प्रदान करने का आग्रह किया।
एक बयान के मुताबिक, विश्व मायोपिया सप्ताह 2026 (18 से 24 मई) के मौके पर यहां एक कार्यक्रम में ऑल इंडिया ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी (एआईओएस) ने बचपन में होने वाले मायोपिया की रोकथाम और प्रबंधन को लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं।
एआईओएस द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों में रोकथाम संबंधी उपायों पर विशेष जोर दिया गया है जिनमें वार्षिक नेत्र परीक्षण, स्कूलों में दृष्टि जांच, मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करना, पढ़ाई के दौरान उचित दूरी बनाए रखना, पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करना और बच्चों को प्रतिदिन कम से कम दो घंटे आउटडोर गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।
इसमें कहा गया है कि लंबे समय तक स्क्रीन का उपयोग, बढ़ता शैक्षणिक दबाव, आउटडोर गतिविधियों में कमी और लंबे समय तक नजदीक से पढ़ने या काम करने की आदत मायोपिया का जोखिम बढ़ाती है।
मायोपिया दिशानिर्देश कार्यक्रम के निदेशक और एम्स स्थित राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र में वरिष्ठ बाल नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ रोहित सक्सेना ने कहा कि निकट की दृष्टि कमजोर होने की समस्या की पहचान समय पर करने और इसके उचित प्रबंधन से बच्चों को भविष्य में होने वाली गंभीर दृष्टि संबंधी जटिलताओं से बचाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि बचपन में 'मायोपिया' से निपटने के लिए आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
डॉ सक्सेना ने कहा, " अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन उपयोग पर नजर रखते हुए संतुलित जीवनशैली सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही पर्याप्त नींद, पोषण और शारीरिक गतिविधियों से समझौता नहीं होना चाहिए।"
ऑल इंडिया ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. जीवन सिंह टिटियाल ने कहा कि कई बच्चे धुंधली दृष्टि की शिकायत नहीं करते क्योंकि उन्हें सामान्य दृष्टि का अनुभव ही नहीं होता।
उन्होंने कहा कि ऐसे में अभिभावकों, शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार के संकेतों को समझते हुए नियमित नेत्र परीक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि समय पर उपचार संभव हो सके।
भाषा नोमान नोमान नरेश
नरेश
1805 1926 दिल्ली