राजा देश की चिंता नहीं करे, तो क्या उसे 'देशप्रेमी' कहेंगे : कांग्रेस
दिलीप
- 20 May 2026, 07:15 PM
- Updated: 07:15 PM
नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में राहुल गांधी की एक टिप्पणी के कारण उपजे विवाद को लेकर बुधवार को दावा किया कि जनता में मोदी सरकार के खिलाफ आक्रोश है और विपक्षी दल को उस गुस्से को प्रकट करना होगा।
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि यदि राजा देश की चिंता नहीं करे, तो क्या उसे ''देशप्रेमी'' कहा जा सकता है?
राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस को '' गद्दार'' करार देते हुए आरोप लगाया कि वे रोजाना संविधान पर हमला कर रहे हैं और चुनिंदा उद्योगपतियों को देश के हित बेच चुके हैं।
इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता के शब्द उनकी अराजक सोच और चरित्र को दर्शाते हैं।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि गांधी की टिप्पणी देश की 140 करोड़ जनता का अपमान है और उन्होंने उनसे माफी मांगने की मांग की।
राहुल गांधी की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ''देश मतलब, देश के लोग हैं। जब देश का राजा लोगों की चिंता करना बंद कर देता है, तो क्या उसको हम देशप्रेमी कह सकते हैं?''
उन्होंने कहा, ''जब वह (प्रधानमंत्री) देश के लोगों को कहते हैं कि खाना कम खाओ, अपने वाहनों में तेल कम डालो, त्याग करो और खुद बड़े-बड़े काफिलों में रोड शो करते हैं, एक विमान में अपने कुछ अधिकारियों के साथ विदेश यात्रा करते हैं। आप तो खुद उदाहरण पेश नहीं कर रहे।''
खेड़ा ने कहा, ''सारा देश त्याग करेगा और अगर कोई सवाल पूछ लेगा, तो वो देशद्रोही कहलाएगा। तो परिभाषाएं तो देख लीजिए जरा, देश की परिभाषा क्या होती है, देशप्रेम की परिभाषा क्या होती है, राजा का धर्म क्या होता है, राज धर्म क्या होता है?''
उन्होंने दावा किया कि देश और समाज के हर तबके में गहरी चिंता का माहौल है और खासकर उन लोगों में भारी नाराजगी और धोखे का अहसास है, जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को वोट दिया था।
कांग्रेस नेता ने कहा, ''देश में गहरी निराशा, उदासी और गुस्सा है और एक ज़िम्मेदार विपक्षी दल के तौर पर हमें उस गुस्से को ज़रूर ज़ाहिर करना होगा। राहुल गांधी ने जो कुछ कहा है, वह उससे कहीं कम है, जो हम सड़कों पर सरकार के बारे में सुनते हैं।''
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दिलीप
2005 1915 दिल्ली