दिल्ली सरकार 'सीएम श्री स्कूलों' में वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पुनर्जीवित करेगी: मुख्यमंत्री
नरेश
- 21 May 2026, 07:16 PM
- Updated: 07:16 PM
नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के 75 'सीएम श्री स्कूलों' में मौजूदा वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पुनर्जीवित और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा बृहस्पतिवार को जारी बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान के मुताबिक, तकनीकी टीमों ने 75 'सीएम श्री स्कूलों' का निरीक्षण कर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और ऑडिट के दौरान सामने आया कि अधिकांश स्कूलों में वर्षा जल संचयन प्रणालियां मौजूद तो हैं, लेकिन वे लंबे समय से बंद पड़ी हैं या उनकी देखरेख नहीं हुई है।
इसमें कहा गया है कि कई स्थानों पर गड्ढे पूरी तरह बंद मिले, कुछ में प्लास्टिक, गाद, मलबा और कचरा भरा हुआ था, जबकि कई स्कूलों को यह तक जानकारी नहीं थी कि उनके परिसर में ऐसी संरचनाएं मौजूद हैं।
बयान के अनुसार, निरीक्षण में यह भी सामने आया कि अनेक स्थानों पर वर्षा जल सीधे नालों में जा रहा है, जिससे जल संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा और कई संरचनाओं में डिजाइन संबंधी खामियां भी पाई गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इन कमियों को दूर करने के लिए विस्तृत सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की है और इसके तहत वर्षा जल पाइपों को उचित चैनलों से जोड़ा जाएगा और जल निकासी मार्गों की नियमित सफाई होगी।
गुप्ता ने कहा कि इसके साथ ही प्रत्येक स्कूल में एक प्रभावी छत पर वर्षा जल संचयन मॉडल स्थापित किया जाएगा, जिससे बारिश के पानी को संग्रहित कर भूजल को रिचार्ज किया जा सके।
उन्होंने कहा कि केवल स्कूलों की छतों से ही लगभग 13 करोड़ लीटर वर्षा जल प्रति वर्ष संरक्षित किया जा सकता है, जबकि कुल जल ग्रहण क्षमता लगभग 50 करोड़ लीटर वार्षिक तक पहुंच सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य राजधानी में वर्षा जल संरक्षण को मजबूत करना, भूजल स्तर सुधारना तथा छात्रों और समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है और इसी दिशा में 75 सीएम श्री स्कूलों में मौजूदा जल संचयन संरचनाओं का ऑडिट कराया गया है।
उन्होंने कहा कि संग्रहित जल का उपयोग पेयजल, बागवानी, सफाई, और अन्य उपयोगों में किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में वर्षा जल संचयन के लिए गैर सरकारी संगठन 'एहसास' मॉडल को अपनाया जाएगा, जिसे दिल्ली जल बोर्ड द्वारा वर्ष 2021 में स्वीकृति दी गई थी। यह मॉडल कम लागत, कम जगह और लगभग शून्य रखरखाव की विशेषता वाला माना जाता है।
गुप्ता ने कहा कि इसके माध्यम से छतों से आने वाले वर्षा जल को फिल्टर कर भंडारण व बोरवेल से जोड़ा जाएगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और सूखे बोरवेल को भी पुनर्जीवित करने में सहायता मिलेगी।
भाषा नोमान नोमान नरेश
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