आगामी खरीफ सत्र के लिए देश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धताः सरकार
रमण
- 25 May 2026, 04:53 PM
- Updated: 04:53 PM
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि आगामी खरीफ सत्र के लिए देश में उर्वरकों की उपलब्धता के साथ इनकी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बाद उर्वरकों का घरेलू उत्पादन अच्छा रहा है और इनकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "देश में उर्वरकों की कुल भंडार स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।"
शर्मा ने कहा कि खरीफ सत्र 2026 के लिए 390.54 लाख टन उर्वरक की जरूरत का आकलन किया गया है जबकि वर्तमान में 200.12 लाख टन का भंडार उपलब्ध है, जो अनुमानित मांग के 50 प्रतिशत से अधिक है। सामान्य तौर पर यह स्तर करीब 33 प्रतिशत होता है।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब तक करीब 95 लाख टन घरेलू उत्पादन और 22.60 लाख टन आयात के जरिए कुल 117.6 लाख टन उर्वरक भंडार में जोड़ा गया है।
इसके अलावा, 13.5 लाख टन डीएपी और नौ लाख टन एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है।
उन्होंने कहा कि इससे खरीफ फसल सत्र की अधिकतम मांग वाले समय में भी पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी। खरीफ फसलों की बुवाई जून मध्य से शुरू होती है।
शर्मा ने यह भी कहा कि उर्वरकों के उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता भी संतोषजनक है और स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है। इस संबंध में सचिवों के अधिकार-प्राप्त समूह की अब तक नौ बैठकें हो चुकी हैं।
शर्मा ने कहा, "तैयार उर्वरकों और कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है। स्थिति स्थिर है और बेहतर तरीके से प्रबंधित है।"
वर्ष 2025 में देश की कुल उर्वरक जरूरत का करीब 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया था। कुल उर्वरक उत्पादन 2021 के 433.29 लाख टन से बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन हो गया।
देश का यूरिया उत्पादन 2014-15 के 225 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन हो गया। हालांकि मांग पूरी करने के लिए पिछले वित्त वर्ष में 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात करना पड़ा था।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
फिलहाल नीम-लेपित यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य 242 रुपये प्रति बोरी (45 किलोग्राम) है जबकि डीएपी को 1,350 रुपये प्रति बोरी (50 किलोग्राम) पर बेचा जा रहा है।
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