जिमखाना क्लब परिसर खाली करने के केंद्र के आदेश के खिलाफ याचिका पर मंगलवार को सुनवाई
नरेश
- 25 May 2026, 06:49 PM
- Updated: 06:49 PM
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों ने केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती देते हुए सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय रुख किया जिसमें क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने को कहा गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के सामने इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए रखा। अदालत ने इस मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर सौंपने को कहा है। सरकार का कहना है कि 27.3 एकड़ की यह जमीन ''रक्षा ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने'' के लिए जरूरी है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में स्थित यह परिसर रक्षा ढांचे को मजबूत करने और अन्य महत्वपूर्ण जन सुरक्षा उद्देश्यों के लिए बेहद जरूरी है।
मुकदमा दायर करने वाले जिमखाना क्लब के 79 वर्षीय सदस्य विजय खुराना ने कहा कि केंद्र द्वारा रक्षा अवसंरचना और सुरक्षा के संबंध में दिए गए "अस्पष्ट और सामान्यीकृत कारण" केवल एक "ढोंग" है और यह कदम कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय "जबरन बेदखली करने का प्रयास" था।
याचिका में दावा किया गया है कि यह अधिग्रहण "सोची-समझी और सुनियोजित योजना" के तहत किया गया है, न कि किसी "वास्तविक या आपातकालीन सार्वजनिक आवश्यकता" के लिए।
खुराना ने कहा कि दिल्ली जिमखाना क्लब के 500 से अधिक सदस्यों ने इस मुकदमे का समर्थन किया।
इसका उद्देश्य केंद्र सरकार को जिमखाना क्लब के चिरस्थायी पट्टे के अधिकारों को "अवैध रूप से निर्धारित" करने से रोकना और लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री के आवास के निकट 2, सफदरजंग रोड पर स्थित ऐतिहासिक परिसर से किसी भी प्रकार के जबरन बेदखली को रोकना है।
याचिका में कहा गया है कि इस मामले में तत्काल अंतरिम सुरक्षा आवश्यक है और दावा किया गया है कि केंद्र ने "जबरदस्ती उपायों" और पुलिस की सहायता से 5 जून को भूखंड पर कब्जा करने की धमकी दी है, जिसके परिणामस्वरूप "अपरिवर्तनीय" और "अपूरणीय" स्थिति उत्पन्न होगी।
याचिका में खुराना ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली जिमखाना क्लब और उसके सदस्यों ने क्लब के विकास, रखरखाव और आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त संसाधन निवेश किए हैं, और केंद्र सरकार इसके संस्थागत अस्तित्व को समाप्त करने और दशकों से अर्जित "मूल्यवान संगठनात्मक, सहभागी और सदस्यता अधिकारों" को अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा 22 मई को जारी किए गए नोटिस में न तो किसी मुआवजे का प्रावधान है और न ही यह शाश्वत पट्टा विलेख के संदर्भ में "सदी पुराने" अधिकारों को एकतरफा रूप से समाप्त करने के लिए "वास्तविक सार्वजनिक उद्देश्य" स्थापित करता है।
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