दिल्ली: पालन-पोषण का खर्च उठाने में असमर्थता के कारण व्यक्ति ने 10 महीने की बेटी की हत्या की
माधव
- 25 May 2026, 09:09 PM
- Updated: 09:09 PM
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) दिल्ली में 25 वर्षीय व्यक्ति ने अपने परिवार के सदस्यों को नशीली दवा देकर अपनी 10 महीने की बेटी की कथित तौर पर हत्या कर दी, क्योंकि वह दूसरी बच्ची के पालन-पोषण का आर्थिक बोझ सहन नहीं कर पा रहा था। पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि आरोपी दीपक ने बच्ची की गला घोंटकर हत्या कर दी और फिर उसकी लाश अपने घर के सेप्टिक टैंक में फेंक दी। उन्होंने बताया कि बाद में आरोपी ने भलस्वा डेयरी पुलिस को गुमराह करने के लिए बच्ची के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी।
अधिकारी के मुताबिक, दीपक पूछताछ के दौरान टूट गया और अपना अपराध कबूल कर लिया, जिसके बाद बच्ची का शव उसके घर के सेप्टिक टैंक से बरामद कर लिया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने पहले दावा किया था कि शनिवार को दूध और बिस्कुट खरीदने के लिए बाहर गया था।
दीपक ने पुलिस को यह भी बताया कि जब वह लौटा तो उसने अपनी पत्नी सूर्या और अपनी बड़ी बेटी को बेहोश पाया और उसकी 10 महीने की बच्ची गायब थी।
पुलिस के अनुसार, कथित अपहरण की सूचना 24 मई को मिली थी।
बाहरी उत्तर जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हरेश्वर स्वामी ने एक बयान में कहा, "मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक व्यापक तलाश अभियान शुरू किया गया। तुरंत कई पुलिस टीम गठित की गईं और बच्ची का पता लगाने तथा संभावित संदिग्धों की पहचान करने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए।"
स्वामी ने बताया कि जांचकर्ताओं को दीपक के बयान में कई गंभीर विसंगतियां मिलीं। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के विस्तृत विश्लेषण से भी दीपक के इस दावे की पुष्टि नहीं हुई कि बच्ची के अपहरण के समय वह बाहर गया हुआ था।
उनके के मुताबिक, दीपक के पिता ने बताया कि जब उसका बेटा घर लौटा, तो उसे बच्ची नहीं मिली।
आरोपी के पिता ने कहा, "हमने आस-पड़ोस के लोगों को बुलाया और बच्ची की तलाश शुरू की, लेकिन वह नहीं मिली। हमने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद बड़े पैमाने पर तलाश अभियान चलाया गया।"
डीसीपी ने कहा, "आसपास के इलाकों से प्राप्त किसी भी सीसीटीवी फुटेज से उसकी गतिविधियों की पुष्टि नहीं हो सकी। गड़बड़ी की आशंका होने पर पुलिस टीम ने जांच तेज कर दी और आरोपी से लगातार पूछताछ की।"
स्वामी ने बताया कि पूछताछ के दौरान दीपक ने कबूल किया कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और दूसरी बेटी के पालन-पोषण का खर्च उठाने में असमर्थ महसूस कर रहा था।
स्वामी के अनुसार, दीपक के कबूलनामे के बाद बच्ची का शव बरामद करने के लिए तुरंत एक टीम उसके घर भेजी गई।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-103(1) (हत्या) जोड़कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने बताया कि भलस्वा डेयरी के मुकुंदपुर निवासी दीपक ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और वह एक निजी स्कूल में वैन चालक के रूप में काम करता था।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या परिवार के किसी अन्य सदस्य को अपराध की जानकारी थी या उन्होंने सबूत छिपाने में दीपक की मदद की थी।
अधिकारी ने कहा, "हम मामले में मादक पदार्थ के पहलू की भी जांच कर रहे हैं, क्योंकि परिवार के कुछ सदस्यों ने दावा किया है कि वे बेहोश हो गए थे।"
इसी बीच, स्थानीय लोगों को परिवार के सदस्यों पर शक होने लगा।
एक स्थानी निवासी ने बताया, "हमने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर हर घर की तलाशी ली। इलाके का हर व्यक्ति परिवार की मदद कर रहा था, लेकिन परिवार के सदस्य लोगों के साथ-साथ पुलिस को भी गुमराह करते रहे।"
एक अन्य निवासी ने इस घटना को "जघन्य" अपराध बताया और आरोपी के लिए कड़ी सजा की मांग की।
उन्होंने कहा, "हमें सुबह करीब नौ बजे फोन आया कि बच्ची लापता हो गई है। इलाके के सभी लोग तलाश में जुट गए और पुलिस ने भी बहुत मेहनत की। लेकिन अब पता चला है कि पिता ने ही बच्ची की हत्या की है। यह एक भयावह और दिल दहला देने वाली हत्या है। भारत में, जहां लड़कियों को पूजा जाता है, एक पिता ने अपनी ही बेटी की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि वह दूसरी बेटी के पालन-पोषण का खर्च नहीं उठा सकता था।"
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव
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