इबोला के दुर्लभ स्वरूप से खतरा, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाओं से संकट और बढ़ा
मनीषा
- 26 May 2026, 11:15 AM
- Updated: 11:15 AM
बुनिया, 26 मई (एपी) कांगो में एक तरफ इबोला वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या जहां बढ़ रही हैं वहीं स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाओं ने संकट को और बढ़ा दिया है।
पूर्वी कांगो में अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता नेटवर्क 'रेड क्रॉस' की स्वयंसेवक वैनी बिरुंगी जब भी इबोला के नवीनतम प्रकोप के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बाहर जाती हैं तो उन्हें दोहरे खतरे का सामना करना पड़ता है क्योंकि वायरस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं होने और स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर स्थिति के कारण उन्हें और उनके जैसे अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को निवासियों के गुस्से और संदेह का सामना करना पड़ता है।
इबोला के दुर्लभ स्वरूप बुंडीबुग्यो से संक्रमण के कारण संदिग्ध मामलों की संख्या 1,000 के करीब पहुंच रही है, वहीं इसका कोई टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है।
बुनिया शहर के निवासियों द्वारा शहर में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले और उन पर पत्थर फेंकने तथा गाली-गलौज की सूचनाएं मिली हैं।
बिरुंगी और उनके सहयोगियों ने चिलचिलाती धूप में एक श्रमिक वर्ग के इलाके में लोगों के समूहों से बात की। उन्होंने सोमवार को 'एसोसिएटेड प्रेस' (एपी) को बताया, ''हम उन्हें लगातार बताते रहते हैं कि बीमारी मौजूद है। कुछ लोग मानते हैं और कुछ नहीं मानते।''
इस अस्थिर क्षेत्र में सहायताकर्मी विशेष रूप से जोखिम में हैं। अमेरिका और अन्य देशों द्वारा दी जाने वाली सहायता में कटौती के कारण ऐसी बीमारियों की निगरानी व्यवस्था कमजोर हो गई है।
संक्रमण के मामले 1,000 के करीब पहुंच गए हैं लेकिन स्वास्थ्य केंद्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
पिछले एक सप्ताह में तीन बार स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले हुए हैं। रविवार को गुस्साए युवकों ने एक अस्पताल पर धावा बोल दिया जहां इबोला रोगियों का इलाज हो रहा था। अस्पताल में गोलियों की आवाजें सुनी गईं और चिकित्सा कर्मचारियों ने रोगियों को बाहर निकाला।
मोनबगवालू के निवासियों के एक समूह ने शनिवार को 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' द्वारा इबोला के संदिग्ध और पुष्ट मामलों के लिए स्थापित एक तंबू पर हमला किया और उसमें आग लगा दी। हमले के दौरान संदिग्ध तौर पर इबोला संक्रमण से ग्रस्त कई लोग केंद्र से बाहर निकल गए।
बृहस्पतिवार को रवाम्पारा कस्बे में एक और उपचार केंद्र को आग लगा दी गई, जब इबोला संक्रमण से जान गंवाने वाले एक स्थानीय व्यक्ति के शव को ले जाने से परिवार वालों को मना कर दिया गया।
इबोला वायरस मृत या बीमार रोगियों के शरीर के तरल पदार्थों जैसे पसीना, रक्त, मल या उल्टी के निकट संपर्क से फैलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी और रोगियों की देखभाल करने वाले परिवार के सदस्य सबसे अधिक जोखिम में हैं।
कांगो में अंतरराष्ट्रीय बचाव समिति की कंट्री निदेशक हीथर केर ने कहा, ''विश्वास स्वास्थ्य प्रतिक्रिया जितना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि समुदायों में भारी अविश्वास पैदा होता है तो लोग स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं जाएंगे।''
क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष एक और चुनौती है। इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया से मोनगबवालू तक यात्रा करने के लिए सहायता समूहों को कांगो की राजधानी किंशासा से 1,000 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित क्षेत्र में संभावित हमलों का जोखिम उठाना पड़ता है।
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने सोमवार को बताया कि इस प्रकोप के अब तक 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 220 से अधिक संदिग्ध मरीजों की मौत हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा, ''हम बहुत तेजी से फैल रही इस महामारी से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हमने अब सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दिया है।''
एपी सुरभि मनीषा
मनीषा
2605 1115 बुनिया