आंध्र प्रदेश के सीईओ ने राजनीतिक दलों को एसआईआर प्रक्रिया की जानकारी दी, सक्रिय भागीदारी का किया आह्वान
दिलीप
- 26 May 2026, 07:37 PM
- Updated: 07:37 PM
अमरावती, 26 मई (भाषा) आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) विवेक यादव ने मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके राज्य में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की जानकारी दी। इस प्रक्रिया के तहत राज्य के 4 करोड़ से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड की समीक्षा करके उसे अद्यतन किया जाएगा, जिसमें एक जुलाई 2026 को अर्हता तिथि माना जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) योजनाबद्ध, सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, ताकि सभी पात्र नागरिकों का नाम सूची में शामिल किया जा सके।
सीईओ के कार्यालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ''आंध्र प्रदेश के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की…। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने एसआईआर प्रक्रिया और इसके विभिन्न चरणों के बारे में विस्तार से बताया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने राजनीतिक दलों को सूचित किया कि सभी पात्र नागरिकों को शामिल करने की सुविधा के लिए यह प्रक्रिया योजनाबद्ध, सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से संचालित की जा रही है।''
सीईओ ने सभी राजनीतिक दलों से आगे आकर मतदाताओं को नामांकन में सहायता करने और प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और सहभागी बनाने के लिए अधिक बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि लगभग 4.16 करोड़ मतदाताओं के लिए गणना प्रपत्र (ईएफ) छापे और वितरित किए जा रहे हैं।
निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) 25 मई, 2026 तक के मौजूदा रिकॉर्ड के आधार पर, आंशिक रूप से पहले से भरे हुए फॉर्म 46,397 बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के माध्यम से उपलब्ध करा रहे हैं।
ये बीएलओ उन सभी मतदाताओं के घर-घर जाकर ईएफ वितरित कर रहे हैं, जिनके नाम 25 मई तक मतदाता सूची में दर्ज हैं।
मतदाताओं के लिए यह फॉर्म निर्वाचन आयोग के पोर्टल से भी डाउनलोड किया जा सकता है और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए प्रतिदिन अधिकतम 50 प्रमाणित फॉर्म जमा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, "जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं, उन्हें केवल गणना प्रपत्र और मतदाता सूची का सारांश जमा करना होगा, अन्य कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है।''
उन्होंने बताया कि प्रपत्र एकत्र करते समय, बीएलओ मतदाताओं को पावती रसीद जारी करेंगे।
ये भौतिक प्रपत्र संबंधित ईआरओ या सहायक ईआरओ (एईआरओ) को जमा किए जाएंगे।
यादव ने कहा कि मतदाताओं की सुविधा के लिए गणना प्रपत्रों को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा विकसित की गई है और यह जल्द ही उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि मसौदा मतदाता सूची 21 जुलाई को प्रकाशित की जाएगी।
उन्होंने कहा, "सूची में उन सभी मतदाताओं के नाम शामिल होंगे, जिनके प्रपत्र समय सीमा तक प्राप्त हो चुके होंगे। जिन नामों के लिए 14 जुलाई, 2026 से पहले कोई गणना प्रपत्र जमा नहीं किया जाएगा, वे मसौदा सूची में शामिल नहीं होंगे।"
उनके अनुसार, ईआरओ और एईआरओ संविधान के अनुच्छेद 326 में निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर प्रपत्रों की जांच करेंगे, जिसके अनुसार मतदाताओं का भारतीय नागरिक होना, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का होना और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना आवश्यक है।
प्रारंभिक समय सीमा चूक जाने वाले मतदाता दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान प्रपत्र 6 और एक घोषणा पत्र का उपयोग करके आवेदन कर सकते हैं। मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी बीएलए प्रतिदिन अधिकतम 10 प्रपत्र जमा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र वापस नहीं आए हैं, उनके संबंध में बीएलए आसपास के मतदाताओं से पूछताछ के आधार पर अनुपस्थिति, स्थानांतरण, मृत्यु या डुप्लीकेट होने जैसे संभावित कारण का पता लगा सकते हैं और उसे नोट कर सकते हैं।
यादव ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, उनकी बूथवार सूचियां संबंधित पंचायत भवन, शहरी स्थानीय निकाय कार्यालय और अन्य संबंधित कार्यालयों में उनके नाम शामिल नहीं होने के संभावित कारणों के साथ प्रदर्शित की जाएंगी।
यादव ने बताया कि 21 जुलाई से 20 अगस्त तक कोई भी आम नागरिक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकता है। उन्होंने कहा कि इस दौरान ईआरओ और एईआरओ अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 और 19 के अनुसार आवेदनों और आपत्तियों की जांच करेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि आम जनता मसौदा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए दावे दर्ज करा सकती है या मौजूदा प्रविष्टियों पर आपत्ति उठा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उचित जांच और संबंधित व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिए बिना कोई भी नाम नहीं हटाया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम मतदाता सूची 22 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ईआरओ के फैसले से असंतुष्ट कोई भी मतदाता जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24(ए) के तहत आदेश की तारीख से 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपील कर सकता है।
यादव ने कहा कि यदि मतदाता आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर भी असंतुष्ट रहता है, तो वह धारा 24(बी) के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है।
इसके अतिरिक्त, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी पात्र नागरिकों से इस विशेष अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया, ताकि कोई भी मतदाता मतदान से वंचित न रह जाए।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप
2605 1937 अमरावती