सोशल मीडिया मानहानि के लिए नहीं: अदालत; सलमान खान के पड़ोसी से पोस्ट हटाने पर विचार करने को कहा
मनीषा
- 11 Jun 2026, 05:32 PM
- Updated: 05:32 PM
मुंबई, 11 जून (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि सोशल मीडिया तक पहुंच होने का यह मतलब नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी के भी खिलाफ, यहां तक कि मशहूर हस्तियों के खिलाफ भी, मानहानिकारक सामग्री पोस्ट कर सकता है।
अदालत ने यह टिप्पणी करने के साथ ही सलमान खान के पनवेल स्थित फार्महाउस के एक पड़ोसी को अभिनेता के खिलाफ अपने पोस्ट हटाने पर विचार करने के लिए कहा।
न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने सवाल किया कि किसी व्यक्ति को अपनी शिकायतें संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष रखने के बजाय सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री क्यों अपलोड करनी चाहिए।
केतन कक्कड़, महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित पनवेल में सलमान खान के फार्महाउस से सटे भूखंड के मालिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता ने फार्महाउस के निर्माण के दौरान पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया और अपने पड़ोस के भूखंड तक पहुंच को अवरुद्ध किया। कक्कड़ ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर संबंधित प्राधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बाद में सलमान खान ने कक्कड़ के खिलाफ एक मानहानि वाद दायर किया, जिसमें कक्कड़ पर अभिनेता की फार्महाउस गतिविधियों से संबंधित वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर अपलोड करने का आरोप लगाया गया। अभिनेता ने दावा किया कि उक्त पोस्ट मानहानिकारक हैं।
खान ने कक्कड़ द्वारा अपलोड किए गए कथित मानहानिकारक वीडियो हटाने का निर्देश देने का अदालत से अनुरोध किया। खान ने साथ ही अदालत से यह भी अनुरोध किया कि वह कक्कड़ द्वारा भविष्य में ऐसी टिप्पणी करने पर भी रोक लगाये। जब एक दीवानी अदालत ने ऐसा आदेश देने से इनकार कर दिया तब खान ने उच्च न्यायालय का रुख किया।
खान ने उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में कहा कि कक्कड़ द्वारा अपलोड किए गए पोस्ट ना केवल मानहानिकारक हैं, बल्कि उनके खिलाफ सांप्रदायिक रूप से उत्तेजक भी हैं।
याचिका बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख के समक्ष सुनवाई के लिए आयी। न्यायमूर्ति देशमुख ने सवाल किया कि किसी व्यक्ति को अपनी शिकायतें संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष रखने के बजाय सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और सामग्री क्यों अपलोड करनी चाहिए।
न्यायमूर्ति देशमुख ने कहा, ''सिर्फ इसलिए कि किसी के पास सोशल मीडिया तक पहुंच है, इसका अर्थ यह नहीं है कि वह किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मानहानि करने के उद्देश्य से वीडियो अपलोड कर सकता है, चाहे वह आम नागरिक हो या मशहूर हस्ती । ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर क्यों डाले जाएं?''
अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या न्यायिक समय केवल यह तय करने में लगना चाहिए कि कोई विशेष सोशल मीडिया पोस्ट मानहानिकारक है या नहीं और उसे हटाया जाना चाहिए या नहीं।
पीठ ने कक्कड़ को सामग्री हटाने पर विचार करने का सुझाव दिया और मामले की अगली सुनवाई छह जुलाई के लिए निर्धारित की।
भाषा अमित मनीषा
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