दिल का दौरा पड़ने के बाद स्वस्थ हो रहे थे जसपाल राणा, अचानक हृदय फटने से हुई मृत्यु : अस्पताल
नरेश
- 12 Jun 2026, 04:12 PM
- Updated: 04:12 PM
नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) भारत के प्रसिद्ध निशानेबाजी कोच जसपाल राणा को दिल का दौरा पड़ने के बाद गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उपचार के बाद वह काफी हद तक स्वस्थ हो चुके थे तथा उन्हें शुक्रवार को छुट्टी दिए जाने की तैयारी थी। लेकिन अचानक हृदय फटने (कार्डियक रप्चर) की घटना के कारण उनका निधन हो गया। अस्पताल ने यह जानकारी दी है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, साकेत के समूह अध्यक्ष (कार्डियक साइंसेज) तथा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी एवं इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राणा को अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था।
डॉ. सिंह ने कहा, ''जसपाल राणा को दिल का दौरा पड़ा (हार्ट अटैक) था, जो अस्पताल पहुंचने से लगभग तीन दिन पहले पड़ चुका था। वह यात्रा कर रहे थे और इस दौरान लगातार सीने में दर्द महसूस कर रहे थे। अस्पताल पहुंचने तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।''
उन्होंने कहा, ''दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार धमनी पूरी तरह अवरुद्ध हो चुकी थी। हृदय की रक्त पंप करने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी और वह हृदयाघात (हार्ट फेल्योर) की स्थिति में थे।''
अस्पताल के अनुसार उपचार के बाद राणा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ था।
डॉ. सिंह ने कहा, ''राणा काफी हद तक स्वस्थ हो चुके थे और आज वह अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की स्थिति में थे। हालांकि, नींद के दौरान उन्हें अचानक कार्डियक रप्चर हुआ, जिसके कारण उनका निधन हो गया।''
उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को दिल का दौरा पड़ने के काफी समय बाद अस्पताल लाया जाता है, उनमें कार्डियक रप्चर जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा बना रहता है, जिससे अचानक मृत्यु हो सकती है।
भारत के सर्वश्रेष्ठ पिस्टल निशानेबाजों में से एक और मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले जसपाल राणा का दिल से संबंधित बीमारी के कारण शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वह 49 वर्ष के थे।
राणा के परिवार में उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी, बेटा युवराज, पिता नारायण सिंह राणा और उनकी बहन सुषमा सिंह और छोटा भाई सुभाष राणा शामिल हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव के अनुसार राणा ने देर रात दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
राणा के असमय निधन से भारतीय निशानेबाजी जगत सदमे में है । उनका अंतिम संस्कार शनिवार को वाराणसी में होगा ।
राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए 'हाई परफार्मेंस कोच' के रूप में कार्यरत थे।
वह हाल में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल की वापसी की उड़ान के दौरान बीमार पड़ गए थे और उन्हें एक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था।
नयी दिल्ली में उतरते ही उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें स्टेंट डाले गए थे।
अपने मुखर स्वभाव, बेबाक टिप्पणी करने और खेल के प्रति जुनून के कारण भारतीय निशानेबाजी जगत में विद्रोही माने जाने वाले इस पूर्व निशानेबाज में असाधारण प्रतिभा थी और उन्होंने महज 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था।
1994 के राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतना उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बड़ी सफलता थी।
दरअसल एशियाई खेलों का उनका स्वर्ण पदक राजा रणधीर सिंह के 1978 में सोने का तमगा जीतने के 16 साल बाद भारत का पहला स्वर्ण पदक था। रणधीर सिंह का हाल ही में वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझने के बाद निधन हो गया था।
एक निशानेबाज के रूप में राणा के करियर का सबसे बड़ा क्षण 2006 के दोहा एशियाई खेलों में आया जब उन्होंने तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीता, जिसमें उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करना भी शामिल था।
एक उत्कृष्ट निशानेबाज के रूप में शानदार करियर के बाद राणा जूनियर राष्ट्रीय टीम के कोच और 'हाई परफॉर्मेंस कोच' के रूप में अपनी भूमिकाओं से भारतीय निशानेबाजी में बदलाव लेकर आए।
कोच के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलता पेरिस में 2024 में खेले गए ओलंपिक खेलों में मनु भाकर को दो कांस्य पदक जीतने में मदद करना था।
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