आईएमए की 'पासिंग आउट परेड' में 515 कैडेट को भारतीय सेना में शामिल किया गया
नेत्रपाल
- 13 Jun 2026, 06:21 PM
- Updated: 06:21 PM
(फोटो के साथ)
देहरादून, 13 जून (भाषा) भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की 'स्प्रिंग टर्म 2026 पासिंग आउट परेड' में शनिवार को नौ महिलाओं समेत 515 अधिकारी कैडेट भारतीय सेना में शामिल किए गए। इस मौके पर कैडेट अधिकारियों के परिजन गौरवान्वित और भावुक नजर आए।
पारंपरिक 'पिपिंग' समारोह ने अकादमी के परिसर को उत्सव के माहौल में बदल दिया, जहां परिजन अपने बेटों और बेटियों के कंधों पर नयी रैंक (पद का प्रतीक) लगाने के लिए लॉन में एकत्र हुए।
कई परिवारों के लिए यह परेड केवल एक समारोह नहीं थी, बल्कि उनके यहां कई पीढ़ियों से चली आ रही सेना में सेवा और देश के लिए दिए गए बलिदान की परंपरा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।
इस बैच ने नौ महिला अधिकारी कैडेट को कमीशन प्रदान किए जाने के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी दर्ज की, जो 1932 से सेना के अधिकारियों की कई पीढ़ियों को प्रशिक्षित करने वाले इस संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था।
इनमें शनन ढाका भी शामिल थीं, जिन्हें पूर्वी लद्दाख में तैनात किया गया है।
ढाका ने कहा, ''एक सैन्य परिवार से आने के कारण सेना में शामिल होना केवल एक करियर का विकल्प नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।'' उन्होंने कहा कि उनके पिता और दादा दोनों ने सेना में सेवा की थी।
उन्होंने कहा, ''मैं सभी से कहूंगी कि बड़े सपने देखें और मेहनत करना जारी रखें। एक दिन आपकी कड़ी मेहनत रंग लाएगी और आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।''
उनके पिता ने अभिभावकों से अपनी बेटियों को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ''एक पिता के रूप में, मैं हर लड़की को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। यह एक सम्मानित पेशा है, जिसके माध्यम से आप देश की सेवा कर सकते हैं और अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं।''
इस मौके पर अकादमी के कैडेट एडजुटेंट विशाल कुमार ने प्रतिष्ठित 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' और नियमित पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया।
कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय बचपन से देखे गए सपने को दिया जिसमें वह सेना में शामिल होना चाहते थे। उन्होंने युवाओं के लिए एक सरल संदेश दिया: ''नैतिक मूल्य और आदर्शों पर चलकर उदाहरण प्रस्तुत करना''।
'एकेडमी अंडर ऑफिसर' (एयूओ) प्रिंस राज ने नियमित पाठ्यक्रम में दूसरा स्थान प्राप्त करने के लिए रजत पदक हासिल किया, जबकि 'सीनियर अंडर ऑफिसर' तेजस भट्ट ने कांस्य पदक हासिल किया।
विशेष प्रविष्टियों में, 'ऑफिसर कैडेट' ऋषभ मिश्रा ने तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम के लिए रजत पदक हासिल किया, अधिकारी कैडेट बोध राज थापा ने एससीओ पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त किया और 'ऑफिसर कैडेट' करण पांडे ने टीईएस पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान हासिल किया। 'जूनियर अंडर ऑफिसर' जैफ सादिद अल्वी को 34 विदेशी कैडेट में प्रथम स्थान हासिल करने पर 'बेस्ट फॉरेन कैडेट' ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। ये विदेशी कैडेट 16 मित्र देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
लेफ्टिनेंट सौरभ चौधरी को 'कोर ऑफ इंजीनियर्स' में कमीशन मिला है।
बिहार के रहने वाले चौधरी ने कहा, ''यह मेरे और मेरे परिवार के लिए अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण है। इस यात्रा के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, जिससे यह उपलब्धि और भी विशेष बन गई है।''
चौधरी के पिता एक सेवारत सैनिक हैं। वह अपने इकलौते बेटे को परिवार की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए देखकर भावुक नजर आए।
उन्होंने कहा, ''हमारे परिवार की तीसरी पीढ़ी अब सेना में सेवा दे रही है। मेरे पिता ने सेना में सेवा की, मैं स्वयं वर्तमान में सेवा कर रहा हूं, और अब मेरे बेटे ने इस विरासत को आगे बढ़ाया है। यह हमारे जीवन के सबसे गर्वपूर्ण क्षणों में से एक है।''
सेवा की भावना आर्यन गिल की कहानी में भी समान रूप से दिखाई दी, जिन्हें पंजाब रेजिमेंट की तीसरी बटालियन में कमीशन दिया गया।
गिल एक सैन्य परिवार से आते हैं। उनके पिता एक सैन्य अधिकारी हैं, उनके दादा 'मानद कप्तान' के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं, उनके मामा सेवा में हैं और उनका छोटा भाई वर्तमान में अकादमी में प्रशिक्षण ले रहा है।
गिल ने कहा, ''देश की सेवा करने की भावना हमारे खून में है और यही बात मुझे सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है।''
उन्होंने कहा, ''हम सभी में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। अकादमी हमें इस तरह प्रशिक्षित करती है कि हम अधिक अनुशासित और जिम्मेदार बन जाते हैं।''
कैडेट अभय सिंह राघव ने कहा कि अकादमी में प्रवेश से पहले और बाद में सबसे बड़ा अंतर वह परिपक्वता है जो व्यक्ति में विकसित होती है।
लेफ्टिनेंट पी. के. एस. कुशवाहा ने अकादमी तक अपनी असामान्य यात्रा को याद किया। जेईई, नीट और एनडीए परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने सैन्य करियर को चुना और चार वर्ष का प्रशिक्षण पूरा किया, जिसका समापन शनिवार को उनके कमीशन प्राप्त करने के साथ हुआ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की 'पासिंग-आउट परेड' का निरीक्षण किया।
इस समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेन्द्र सिंह, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और कैडेट के परिवार शामिल हुए।
भाषा
देवेंद्र नेत्रपाल
नेत्रपाल
1306 1821 देहरादून