अमेरिकी हमले में मारे गए नाविक के परिवार ने जांच की मांग की
दिलीप
- 13 Jun 2026, 08:15 PM
- Updated: 08:15 PM
शिमला, 13 जून (भाषा) होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक तेल टैंकर पर अमेरिकी हमले में मर्चेंट नेवी कैडेट आदित्य शर्मा (23) की मौत होने के दो दिन बाद शनिवार को उनके पिता राजेश शर्मा ने मृत्यु के कारणों की जांच कराने की मांग की।
राजेश ने सवाल किया कि यदि हमले के बाद आदित्य की सांसें चल रही थीं, तो उसे समय पर प्राथमिक उपचार क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि आदित्य के सिर में गंभीर चोट लगी थी।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए शर्मा ने यह सवाल भी किया कि संभावित अमेरिकी हमले की खबरें कई दिन से प्रसारित होने के बावजूद जहाज के कैप्टन ने ओमान की ओर यात्रा जारी क्यों रखी।
उन्होंने सवाल किया कि जब चालक दल के 21 अन्य सदस्यों को बचा लिया गया, तो तीन नौसैनिकों की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी।
दस जून को ओमान की खाड़ी में पलाऊ के ध्वज वाले एमटी सेटेबेलो जहाज पर अमेरिकी हवाई हमले में परिवीक्षा पर तैनात एक 'डेक कैडेट' आदित्य की मौत हो गई थी।
अमेरिका ने दावा किया था कि इस जहाज से अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल की ढुलाई का प्रयास किया जा रहा था। जहाज पर भारतीय चालक दल के 24 सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया।
अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र आदित्य हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के भालू गांव के निवासी थे।
शर्मा ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनके पुत्र का शव अब भी जहाज पर है और उसे पोस्टमार्टम जांच के लिए स्थानांतरित किया जा रहा है।
उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि शव को स्वदेश लाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि परिवार अंतिम संस्कार कर सके।
आदित्य की मृत्यु के बाद गांव में शोक की लहर फैल गई। परिवार के सदस्य उनका शव लाए जाने की बेचैनी से प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आदित्य के चाचा संजीव लखनपाल ने कहा कि उन्होंने नौवहन महानिदेशालय के अधिकारियों से बात की है, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी।
लखनपाल ने आरोप लगाया कि कंपनी पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू करने में विफल रही।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कुछ दिन पहले एक अन्य जहाज पर कथित हमले के बावजूद अतिरिक्त एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए गए और संभावित अमेरिकी हमले की चेतावनियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने दावा किया कि एक ओर कंपनी का कहना था कि हमले के समय जहाज स्थिर अवस्था में था, तो दूसरी ओर आदित्य ने अपने पिता को बताया था कि वह ईरान की ओर बढ़ रहा था।
इससे पहले, हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा था कि उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अनुरोध किया है कि वह ओमान स्थित भारतीय दूतावास के जरिये स्थानीय अधिकारियों और कंपनी के साथ समन्वय स्थापित करके आदित्य का शव जल्द से जल्द स्वदेश लाए जाने का प्रयास करें।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी शोक व्यक्त किया और फोन पर शोकसंतप्त परिवार से बात की। उन्होंने जिला प्रशासन को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप
1306 2015 शिमला