पंजाब : अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया
रंजन
- 15 Jun 2026, 08:46 PM
- Updated: 08:46 PM
चंडीगढ़, 15 जून (भाषा) सिखों की शीर्ष धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने एक कथित आपत्तिजनक वीडियो में झूठ बोलने के मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सोमवार को 'गुरु द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित कर दिया।
अकाल तख्त ने धार्मिक बेअदबी रोधी कानून के सिलसिले में 29 जून को राज्य के सभी सिख विधायकों (चाहे वे किसी भी पार्टी के हों) और पंजाब मंत्रिमंडल को तलब किया है।
अमृतसर में 'पांच सिंह साहिबान' (सिख धर्मगुरुओं) की बैठक के बाद, अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने अकाल तख्त की 'फसील' (मंच) से यह आदेश सुनाया।
गड़गज ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो की दो फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में जांच कराई गई और वीडियो 'असली' पाया, जिसमें कथित तौर पर भगवंत मान जैसे दिखने वाले एक व्यक्ति दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि वीडियो से न तो छेड़छाड़ की गई है और न ही यह कृत्रिम मेधा (एआई) प्रौद्योगिकी से बनाया गया था।
गड़गज ने कहा कि जब मान ने घोषणा की थी कि वे वीडियो की फोरेंसिक जांच के लिए तैयार हैं, जिसके बाद जनवरी में अकाल तख्त सचिवालय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि पत्र का कोई जवाब नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने दो प्रयोगशालाओं से वीडियो की जांच करवाई।
गड़गज ने दावा किया, ''मुख्यमंत्री का पद सम्मानजनक होता है। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह (मान) ने अकाल तख्त पर (वीडियो के बारे में) झूठ बोला।''
उन्होंने सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ के मंच से कहा कि पांच सिंह साहिबानों ने मुख्यमंत्री को 'गुरु द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया है।
यह मामला इस साल जनवरी में अकाल तख्त द्वारा मान को समन किये जाने से जुड़ा है। उन पर 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारे का दान-पात्र) के बारे में कथित तौर पर टिप्पणी करने और कुछ वीडियो क्लिप में 'सिख गुरुओं' व मारे गए उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ 'आपत्तिजनक गतिविधियों' में संलिप्त होने का आरोप था।
मान 15 जनवरी को अमृतसर में अकाल तख्त के सचिवालय के सामने पेश हुए और कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो फर्जी थे।
धार्मिक बेअदबी कानून 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनयम, 2026' के बारे में गड़गज ने कहा कि सिख विधायकों को, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, और पंजाब मंत्रिमंडल के सदस्यों को 29 जून को अकाल तख्त के सामने पेश होना चाहिए।
अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी ने पहले बेअदबी-रोधी कानून पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि इसे सिख पंथ से परामर्श किये बिना बनाया गया है।
अकाल तख्त ने इससे पहले राज्य सरकार से कहा था कि वह धार्मिक बेअदबी रोधी कानून से उन प्रावधानों को हटा दे जो ''गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और 'संगत' (सिख समुदाय) की भावनाओं के खिलाफ हैं।''
इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने के दोषी को उम्रकैद की सजा सहित कड़े प्रावधान हैं।
भाषा धीरज रंजन
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